अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका के बाहर बनी फिल्मों पर 100% टैरिफ लगाने के फैसले ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को चिंता में डाल दिया है। फिल्मकारों का कहना है कि यह कदम न केवल भारतीय फिल्मों की अमेरिकी बाजार में पहुंच को प्रभावित करेगा, बल्कि दर्शकों की पसंद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी असर डालेगा।
फिल्ममेकर कबीर खान ने इस फैसले को भारतीय सिनेमा के लिए नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्में अमेरिका में बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करती हैं और वहां बसे भारतीय समुदाय के लिए यह फिल्मों से जुड़ाव बनाए रखने का जरिया है। लेकिन टैरिफ बढ़ने से टिकट महंगे होंगे और दर्शकों की संख्या घट सकती है।
निर्माता आमिर राय ने भी चिंता जताते हुए कहा कि यह फैसला वैश्विक स्तर पर फिल्म उद्योग को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि फिल्मों का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ संस्कृति को जोड़ना भी है, लेकिन अगर ऐसे टैक्स लगाए जाएंगे तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्मों की आवाजाही पर रोक लगेगी।
भारतीय फिल्म उद्योग के अन्य सदस्यों का भी मानना है कि यह कदम अमेरिकी बाजार में भारतीय फिल्मों की हिस्सेदारी को घटा देगा। हॉलीवुड के साथ प्रतिस्पर्धा करना पहले से ही कठिन है, और अब इस टैरिफ से छोटे और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं की स्थिति और मुश्किल हो जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय फिल्में न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि भारत की संस्कृति और परंपराओं को भी वैश्विक स्तर पर ले जाती हैं। ऐसे में इस तरह का फैसला सांस्कृतिक कूटनीति के लिए भी बाधा साबित हो सकता है। फिल्म इंडस्ट्री ने उम्मीद जताई है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार होगा और भारतीय फिल्मों को वैश्विक मंच पर निष्पक्ष अवसर मिलेगा।















