रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे से पहले कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। यूके, फ्रांस और जर्मनी के राजदूतों ने संयुक्त रूप से यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर पुतिन की आलोचना करते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया। इस लेख में तीनों देशों ने रूस पर यूक्रेन में आक्रमण जारी रखने का आरोप लगाया और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध को रोकने और क्षेत्रीय स्थिरता वापस लाने के लिए रूस को अपनी नीतियों में परिवर्तन करना चाहिए। पुतिन की भारत यात्रा को इन पश्चिमी देशों के बयान से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि भारत वर्तमान में वैश्विक राजनीति में एक संतुलनकारी भूमिका निभा रहा है।
बयान सामने आने के बाद भारत ने इस पर आपत्ति जताई। भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी राजदूत द्वारा भारत की विदेश नीति या द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करने की कोशिश उचित नहीं है। भारत का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर सभी देशों से संबंध रखता है। भारत ने यह भी याद दिलाया कि राजनयिकों को विएना कन्वेंशन के तहत मेजबान देश के आंतरिक मामलों या द्विपक्षीय वार्ताओं में दखल देने से बचना चाहिए। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार क्षेत्रों में सहयोगी रहे हैं। ऐसे में पुतिन की यात्रा को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिमी देशों के इस बयान ने जरूर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, लेकिन भारत ने अपने रुख में स्पष्टता दिखाते हुए कहा है कि वह स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता रहेगा और वैश्विक दबावों के बजाय अपने हितों को प्रमुखता देता रहेगा।















