मुजफ्फरनगर। संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय फसल अनुसंधान प्रणाली और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ में भारत और केन्या के चयनित क्षेत्रों के किसानों को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य जलवायु एवं सामाजिक मूल्यों के अनुरूप बेहतर पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग और लाभकारी कृषि तकनीकों व नवाचारों के समन्वय को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में दोनों देशों के कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।कार्यशाला में उप कृषि निदेशक प्रमोद कुमार सिरोही ने उत्तर प्रदेश के चयनित पांच जनपदों में मुजफ्फरनगर को शामिल किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जनपद कृषि विविधीकरण, तकनीकी नवाचार और जलवायु अनुकूल खेती के लिए उपयुक्त संभावनाएं रखता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि परियोजना के सभी मानकों पर खरा उतरते हुए मुजफ्फरनगर में किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक और लाभकारी समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रमोद सिरोही ने बताया कि परियोजना के तहत प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जल, मृदा और जैव विविधता के संतुलित उपयोग के साथ ऐसी कृषि पद्धतियों को अपनाया जाएगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण खेती पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए फसल विविधीकरण, टिकाऊ खेती, कम लागत वाली तकनीक और आधुनिक अनुसंधान आधारित उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी।कार्यशाला में कृषि निदेशक उत्तर प्रदेश डॉ पंकज त्रिपाठी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को जलवायु अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से नई तकनीकों और अनुभवों का आदान-प्रदान संभव होगा, जिससे किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि भारत और केन्या जैसे देशों के बीच सहयोग से छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।
निदेशक आईआईएफएसआर डॉ सुशील कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और जमीनी स्तर पर उसके प्रभावी क्रियान्वयन के बिना टिकाऊ कृषि संभव नहीं है। इस परियोजना के माध्यम से वैज्ञानिक तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। सेवा निवृत अपर मुख्य सचिव कृषि डॉ अमित मोहन प्रसाद ने भी विचार रखते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती है और इससे निपटने के लिए नीति, विज्ञान और किसानों के अनुभवों का समन्वय आवश्यक है।कार्यशाला में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भी अपने विचार साझा किए। सभी ने एकमत से माना कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय परियोजनाएं किसानों को नई सोच, नई तकनीक और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी। मुजफ्फरनगर का चयन जनपद के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में यहां की कृषि को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।















