अलवर के सर्किट हाउस में रामगढ़ के पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मौजूदा राजनीति में जनता के वास्तविक मुद्दों—विकास, बेरोज़गारी, किसानों की समस्या और सुरक्षा—की जगह केवल वोट बैंक की राजनीति हावी होती जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ये नेता केवल मुस्लिम वोटों के गणित में उलझे रहते हैं और जनता की परेशानियों से पूरी तरह बेखबर हैं।
आहूजा ने कहा कि राजस्थान की राजनीति ऐसे नेताओं के हाथों में चली गई है जो हिंदू भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के कई बड़े नेता धार्मिक मुद्दों पर असंवेदनशील बयान देते हैं और जब विवाद बढ़ता है तो वोट बैंक को बचाने के लिए अपनी बातों से मुकर जाते हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अब जनकल्याण और विकास जैसे बुनियादी मुद्दों से भटक चुका है, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
पूर्व विधायक ने आगामी 2025 के चुनाव को कई बड़े नेताओं के लिए चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल काम के आधार पर वोट करेगी और नेताओं को जवाब भी देगी। आहूजा ने दावा किया कि भाजपा के तीन और कांग्रेस के तीन मौजूदा जन प्रतिनिधि आगामी चुनाव में अपनी सीट बचा नहीं पाएंगे, क्योंकि जनता अब जागरूक है और उसे केवल वादों से नहीं, बल्कि जमीन पर किए कामों से फर्क पड़ता है।
आहूजा ने यह भी बताया कि उन्होंने हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिखकर भगवान विष्णु के संदर्भ में हुई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना था कि धर्म और आस्था पर चोट करने वाली किसी भी टिप्पणी को समाज बर्दाश्त नहीं करता, क्योंकि इससे करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता लगातार हिंदू समाज में भ्रम फैलाने और आस्था को राजनीतिक फायदा उठाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
आहूजा ने कहा कि भाजपा ने हमेशा हिंदू संस्कृति, परंपरा और मूल्यों की रक्षा की है, जबकि कांग्रेस हर मुद्दे को धार्मिक विभाजन की नजर से देखती है। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति को अब हिंदू हित, राष्ट्रीय हित और जनहित की जरूरत है, न कि जाति-धर्म आधारित वोट बैंक की।















