उत्तर प्रदेश में 30 ग्रीनफील्ड टाउनशिप्स का निर्माण, शहरीकरण को नई दिशा देने की बड़ी योजना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के शहरीकरण को आधुनिक और नियोजित स्वरूप देने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। इसके तहत उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद (UPHDB) ने 13 प्रमुख शहरों में 30 ग्रीनफील्ड टाउनशिप्स विकसित करने की योजना पर काम तेज कर दिया है। इस परियोजना के लिए 6000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट पहले ही मंजूर हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि छोटे और मध्यम शहरों को भी मेट्रो सिटी की तरह विकसित किया जाए, जिससे आवास की कमी को दूर किया जा सके और नियोजित शहरीकरण को बढ़ावा मिले।

यूपी टाउनशिप नीति 2023 के अंतर्गत शुरू की गई इस योजना में अलीगढ़, मेरठ, झांसी, मथुरा, आगरा, मुरादाबाद, कानपुर, फिरोजाबाद, बुलंदशहर, बांदा, अयोध्या, रामपुर और सहारनपुर जैसे शहरों को शामिल किया गया है। इन शहरों में बनने वाली टाउनशिप्स न्यूनतम 12.5 एकड़ में फैली होंगी। हर टाउनशिप में आवासीय, वाणिज्यिक और सामुदायिक ढांचे का संतुलित मिश्रण होगा, ताकि लोगों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त जीवनशैली मिल सके। अधिकारियों के अनुसार, कुछ परियोजनाओं का कार्य सितंबर 2025 से शुरू कर दिया जाएगा, जबकि दिवाली तक कई टाउनशिप्स का निर्माण कार्य गति पकड़ लेगा।

सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य केवल रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूती देना नहीं है, बल्कि मध्यम और निम्न-आय वर्ग के लिए किफायती और गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना भी है। आज के समय में छोटे शहरों में भी तेजी से जनसंख्या और रोजगार की मांग बढ़ रही है। ऐसे में नियोजित टाउनशिप्स लोगों को बेहतर आवास, यातायात, शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन की सुविधाएं एक ही स्थान पर प्रदान करेंगी। इससे अव्यवस्थित शहरीकरण और अनियोजित कॉलोनियों की समस्या को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।

वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से सरकार ने इस योजना को सफल बनाने के लिए एक अभिनव मॉडल अपनाया है। भूमि अधिग्रहण की लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी। इसके बाद विकास प्राधिकरण यह राशि अगले 20 वर्षों में किस्तों के रूप में वापस करेंगे। इससे तत्काल वित्तीय दबाव कम होगा और परियोजनाओं को शीघ्र गति मिल सकेगी। इसके अतिरिक्त, डेवलपर्स को प्रोत्साहित करने के लिए रूपांतरण शुल्क में 25 से 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। इससे उन्हें परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।

योजना की कार्यान्वयन प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए एकल-खिड़की (सिंगल विंडो) समाशोधन तंत्र लागू किया गया है। इस तंत्र के माध्यम से परियोजनाओं की मंजूरी और निष्पादन में तेजी आएगी और डेवलपर्स को अनावश्यक प्रशासनिक जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी। सरकार का विश्वास है कि इस प्रणाली से समय पर काम पूरा होगा और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

इस महत्वाकांक्षी पहल से न केवल शहरों की आबादी को बेहतर जीवन स्तर मिलेगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। निर्माण कार्य के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को काम मिलेगा और टाउनशिप्स तैयार होने के बाद रियल एस्टेट, व्यापार और सेवा क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना उत्तर प्रदेश को आधुनिक शहरी ढांचे के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कर सकती है।

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