अस्पताल-बाजार हर जगह, टीबी की दवाओं का संकट

लखनऊ।टीबी रोगियों को दवाएं न मिलने से उनका इलाज अधर में फंस गया है। अस्पतालों के साथ बाजार में टीबी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। डॉट्स सेंटरों पर दवाओं की किल्लत है, जिसके चलते रोगियों को दो और तीन दिन की दवाएं दी जा रही हैं।वो आधी अधूरी दवाएं मिल रही हैं। खासकर एमडीआर टीबी रोगियों के लिए आफत बढ़ गई। इन रोगों का इलाज बीच में बंद नहीं किया जा सकता है।

अस्पतालों और डॉट्स सेंटर पर टीबी रोगियों की दवाओं का संकट बीते कई महीने से बना है। सरकारी अस्पतालों में दवाएं मुहैया कराने वाली एजेंसी ने जरूरत अनुसार दवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही है। अस्पतालों को बाजार से दवाएं खरीदने का बजट मिला था, लेकिन बाजार में कई दवाएं नहीं हैं। किल्लत की वजह साफ नहीं, कारोबारियों का कहना है कि कंपनियों से संकट है। खासकर एमडीआर टीबी के रोगियों के आगे बड़ी समस्या हो गई है। टीबी रोगियों को नियमित दवाएं खानी होती हैं। इलाज के बीच में दवा बंद नहीं की जा सकती है, लेकिन दवाएं उपलब्ध न होने से रोगी दवाएं नहीं खा पा रहे हैं। रोगी बढ़ी हुई समस्या के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

टीबी की दवाओं की उपलब्ध जरूरत अनुसार नहीं है। रोगियों को बिना दवा नहीं लौटाया जा रहा है। डाट्स सेंटर पर रोगियों को दो से तीन दिन की दवाएं दी जा रही है। उम्मीद है कि एक हफ्ते में किल्लत दूर हो जाएगी।

 

– डॉ. एके सिंघल, स्टेट टीबी ऑफिसर

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