मुजफ्फरनगर के मीरापुर विधानसभा क्षेत्र स्थित हैदरपुर वेटलैंड को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से यहां “पानी की पाठशाला” जैसे प्रभावी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका मकसद जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और वेटलैंड के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना था। कार्यक्रम में मुजफ्फरनगर के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाटक प्रस्तुत किए, जिनमें जल बचाओ और पर्यावरण संरक्षण का संदेश बेहद प्रभावशाली अंदाज में दिया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ मंडलायुक्त सहारनपुर रूपेश कुमार ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पानी जीवन का मूल आधार है, इसलिए इसका संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों को छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाने की अपील करते हुए कहा कि पानी की बोतल को बेकार न फेंकें, उसमें बचा पानी भी उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने पर्यावरण संतुलन के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण और खेतों में पराली न जलाने पर जोर दिया। किसानों से कहा गया कि पराली को खेत में जुताई के साथ मिलाकर खाद के रूप में इस्तेमाल करें, जिससे फसल की पैदावार भी बढ़ेगी और प्रदूषण भी नहीं होगा।
रूपेश कुमार ने सभी उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि हैदरपुर वेटलैंड प्रदेश का अनमोल प्राकृतिक धरोहर है, जहां हर साल हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं। इसे पर्यटन के रूप में विकसित करने से न केवल जिले की पहचान बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता इस वेटलैंड को पर्यावरण पर्यटन का एक आदर्श मॉडल बनाना है, जहां लोग प्रकृति को नजदीक से समझ सकें।कार्यक्रम में सहारनपुर मंडल के उच्च अधिकारियों के साथ पद्मश्री सम्मानित उमाशंकर पांडे, सेतपाल सिंह और कमल सिंह चौहान भी मौजूद रहे। एसपी अभिषेक कुमार वर्मा सहित मुजफ्फरनगर प्रशासन का पूरा अमला इस पहल से जुड़े कार्यक्रम में सहभागी बना, जिसने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।हैदरपुर वेटलैंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। प्रशासन का लक्ष्य है कि इसे देश के प्रमुख वेटलैंड पर्यटन स्थलों में शामिल किया जाए, ताकि लोग यहां की प्राकृतिक सुंदरता, जैव-विविधता और पक्षियों के आवास को समझ सकें। कार्यक्रम में उपस्थित बच्चों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने जल व पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार, वनाधिकारी अभिनव राजा, उप जिलाधिकारी जानसठ, उप जिलाधिकारी बुढ़ाना न्यायिक, तहसीलदार जानसठ, प्रगतिशील किसान, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, अध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।“पानी की पाठशाला” कार्यक्रम ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन केवल सरकारी कार्य नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आने वाले समय में हैदरपुर वेटलैंड का पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होना मुजफ्फरनगर के लिए एक नई पहचान और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
















