पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने राज्य की राजधानी कोलकाता में स्थित राज्यपाल आवास का नाम बदलने का बड़ा निर्णय लिया है। लंबे समय से ‘राजभवन’ के नाम से जाना जाने वाला यह प्रतिष्ठित भवन अब ‘लोक भवन’ के नाम से जाना जाएगा। यह बदलाव केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुपालन में किया गया है, जिसे राज्यपाल ने औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। यह भवन न केवल राज्यपाल का आधिकारिक निवास है बल्कि उनका कार्यालय भी इसी परिसर में संचालित होता है। नाम परिवर्तन के साथ ही इसका महत्व और भूमिका जनता के प्रति अधिक जवाबदेह और लोकतांत्रिक भावना से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
HG renaming Raj Bhavan as LOK BHAVAN pic.twitter.com/POvBPFG26p
— Lok Bhavan, Kolkata, Social Media (@BengalGovernor) November 29, 2025
इस संबंध में जारी एक आधिकारिक अधिसूचना में राज्यपाल ने उल्लेख किया कि यह निर्णय सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक वैचारिक संदेश भी निहित है। उन्होंने बताया कि 27 मार्च 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपाल के अनुरोध पर तत्कालीन राजभवन की प्रतीकात्मक चाबी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सौंपी थी। उनके अनुसार यह कदम ‘जन राजभवन’ की अवधारणा की शुरुआत का प्रतीक था, जिसमें राजभवन को जनता के लिए अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने का संदेश निहित है। उसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए राज्यपाल बोस ने अब इसके नाम को ‘लोक भवन’ में परिवर्तित किया है, ताकि यह भवन जनता से जुड़ी भूमिका को और अधिक स्पष्ट रूप से दर्शा सके।
राज्यपाल के इस फैसले को प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘लोक भवन’ नाम यह संकेत देता है कि शासन प्रणाली का केंद्र बिंदु जनता है और सरकारी संस्थानों का मूल उद्देश्य भी नागरिकों से जुड़े हितों को प्राथमिकता देना है। यह परिवर्तन राज्य के संवैधानिक पद और उसके कार्यालय को नई पहचान देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। नाम परिवर्तन से जनता में यह संदेश भी जाएगा कि उनके द्वारा चुनी गई सरकार और संवैधानिक पदाधिकारी राज्य के संचालन में जनता की भूमिका और अपेक्षाओं को सर्वोपरि रखते हैं।
कुल मिलाकर, ‘राजभवन’ से ‘लोक भवन’ तक का यह परिवर्तन सिर्फ एक औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में जनता की भागीदारी और पारदर्शिता को महत्व देने की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है।















