मुजफ्फरनगर में छात्रों की बढ़ती मानसिक समस्याओं और आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से आज भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के एक प्रतिनिधिमंडल ने धर्मेंद्र मलिक के नेतृत्व में जिलाधिकारी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने जनपद में राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम नीति और उम्मीद निर्देशिका को लागू करने के लिए तत्काल समिति गठित करने की मांग उठाई। साथ ही बुढ़ाना के डीएवी डिग्री कॉलेज में व्याप्त अनियमितताओं की शिकायतों को देखते हुए स्वतंत्र जांच समिति बनाने का भी अनुरोध किया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि देशभर में छात्रों के बीच बढ़ते तनाव, दबाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने 28 जुलाई 2025 को सुकदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके तहत सभी जिलों में आत्महत्या रोकथाम नीति के अनुरूप कमेटियों का गठन अनिवार्य किया गया है। लेकिन मुजफ्फरनगर सहित कई जिलों में अभी तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया, जिससे छात्र असुरक्षित माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
मांगपत्र में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए पांच प्रमुख बिंदुओं पर ज़ोर दिया गया। पहला—100 से अधिक छात्रों वाले सभी संस्थानों में कम-से-कम एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की नियुक्ति की अनिवार्यता। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मनोवैज्ञानिक, काउंसलर या सामाजिक कार्यकर्ता जैसे विशेषज्ञ संस्थानों में उपलब्ध हों, ताकि समय पर छात्रों को सहायता मिल सके। परीक्षा के दबाव या शैक्षणिक बदलाव के समय छोटे बैचों के लिए समर्पित मेंटर और काउंसलर नियुक्त करने की भी मांग की गई।
दूसरा—सभी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए साल में दो बार मानसिक स्वास्थ्य, मनो-पहली सहायता, आत्म-हानि रोकथाम, चेतावनी संकेत पहचानने और रेफरल मैकेनिज्म पर अनिवार्य प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि संवेदनशील पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के साथ संवाद और सहयोग के लिए स्टाफ का सही तरीके से प्रशिक्षित होना जरूरी है।
तीसरा—यौन उत्पीड़न, रैगिंग और बुलिंग जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए संस्थानों में गोपनीय और मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनाई जाए। ऐसे मामलों में पीड़ित छात्रों को तत्काल मनो-सामाजिक समर्थन और पेशेवर काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए, ताकि घटनाएं आत्म-हानि की दिशा में न बढ़ें।
चौथा—सभी कोचिंग सेंटरों का अनिवार्य पंजीकरण तथा पंजीकरण नवीनीकरण के समय मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं, शिकायत निवारण तंत्र और कुप्रथाओं की रोकथाम के उपायों की अनिवार्य जांच की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बिना इन व्यवस्थाओं के किसी भी कोचिंग को चलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
पांचवां—फीस के आधार पर छात्रों के अपमान को पूरी तरह रोकने के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश बनाए जाएं। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि फीस न दे पाने की स्थिति में कई बार छात्रों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया जाता है, जिससे उनमें अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती है।
प्रतिनिधिमंडल ने डीएवी डिग्री कॉलेज बुढ़ाना में अव्यवस्थाओं और छात्रों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। इस पर जिलाधिकारी ने शासनादेश का परीक्षण कर समिति गठित करने तथा कॉलेज की स्वतंत्र जांच कराने का आश्वासन दिया। बैठक में छात्र नेता विशु मलिक, मोहित मलिक, अनुप राठी एडवोकेट, श्रेय चौधरी, अमृत, कपिल राठी सहित कई लोग मौजूद रहे।















