मैक्रों के भारत दौरे से रक्षा साझेदारी मजबूत, राफेल और हैमर मिसाइल पर बड़े फैसले संभव.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल जीन  की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी मुंबई में उनका स्वागत करेंगे। इस दौरे में राफेल लड़ाकू विमानों की अतिरिक्त खरीद, हैमर मिसाइलों के संयुक्त विनिर्माण और अगले दस वर्षों के लिए रक्षा समझौते के नवीनीकरण जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और रूस पर बढ़ती निर्भरता में बदलाव के बीच फ्रांस भारत के लिए एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है।

भारत पहले ही फ्रांस से 36 Dassault Rafale विमान खरीद चुका है, जो वायुसेना की ताकत में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अब नौसेना के लिए समुद्री संस्करण के राफेल विमानों की खरीद पर भी चर्चा चल रही है। इसके साथ ही हैमर मिसाइल प्रणाली के संयुक्त उत्पादन पर सहमति बनने से मेक इन इंडिया को बल मिलेगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिलेगी। हैमर मिसाइल अपनी सटीक मारक क्षमता और हर मौसम में लक्ष्य भेदने की क्षमता के लिए जानी जाती है।

दौरे के दौरान भारत और फ्रांस के बीच दीर्घकालिक रक्षा सहयोग रोडमैप को भी अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसमें तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान, समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक समन्वय शामिल रहेगा। फ्रांस पहले से ही पनडुब्बी, हेलीकॉप्टर और उन्नत रडार प्रणाली जैसे क्षेत्रों में भारत का प्रमुख साझेदार रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, यह यात्रा केवल रक्षा सौदों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को भी नई गति देगी। फ्रांस का झुकाव भारत के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है। ऐसे में मैक्रों का यह दौरा भारत-फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला साबित हो सकता है।

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