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बुढ़ाना । क्षेत्र के गांव कुरथल निवासी पूर्व सीएमओ जगवीर सिंह का मानना है कि दलित समाज हमेंशा अपने शीर्ष नेताओं के प्रति वफादार रहा है ताकि उनकी तरक्की हो और आगे बढ़े।उन्होंने कहा कि में आप को 1969 की ओर ले जाना चाहता हूँ कि उस समय काँग्रेस में दो फाड़ हो गई थी और श्रीमती इंदिरा गांधी के साथ दो बहुत बड़े नेता माननीय श्री फकरुद्दीन अली अहमद और बाबू जगजीवन राम रह गए थे उस मुश्किल दौर में श्रीमती इंदिरा गांधी ने जी ने बाबू जगजीवनराम जी को काँग्रेस का अध्यक्ष बनाया कुछ ऐसा ही समय अब काँग्रेस का था जिस समय मलिकार्जुन खड़गे जी को राष्ट्रीय काँग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था।उस समय बाबू जगजीवन राम जी ने जी तोड़ मेहनत की ओर 1971 के आम चुनाव में 350 सीटों जीत कर काँग्रेस को थंपिंग मैजोरिटी दिलाई और बाबू जी के साथ सम्पूर्ण भारत का दलित साथ खड़ा नजर आया। इसी प्रकार आज भारत का दलित खड़गे जी के साथ खड़ा है । दलितों ने हमेशा देश हित में मतदान किया है। 1977 में जब जनता पार्टी बनी तो उसमें कोई जान नहीं थी लेकिन बाबू जगजीवनराम जी कुछ मतभेदों के कारण इन्दिरा गांधी से अलग हो गए और फिर जयप्रकाश नारायण आदि नेता उनको जनता पार्टी में ले आये और उनकी अगुवाई में1977 का आम चुनाव लड़ा गया तो पूरे देश में जनता पार्टी जीत गई। लेकिन जब प्रधानमंत्री बनने की बात आई तो उस समय की जनसंघ जो आज बीजेपी पार्टी है ने बाबू जी के खिलाफ एक मुहीम चलाई की दलित प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए इस पर उन्होंने जयप्रकाश नारायण जी को अपने साथ लिया और मोरारजी देसाई जी को देश का प्रधानमंत्री बना दिया। आज भी ऐसा ही होने जा रहा है कि बीजेपी अपने मीडिया मित्रों की मदद से देश मे एक परसेप्शन बना रही है कि बीजेपी जीत रही है जबकि हकीकत इसके उलट है। हम सब जानते हैं इस बार जनता ने इण्डिया गठबंधन के हक में वोट किया है और इस देश का दलित खड़गे जी के साथ खड़ा है जैसे बाबू जी के साथ 1971 के इलेक्शन में खड़ा था। उन्होंने कहा कि हमने अपना सर्वे किया हुआ है कि दलित समाज की 1.8 लाख से लेकर 3.8लाख तक वोट पार्लियामेंट की 543 हर सीट पर है। 90 सीटें ऐसी हैं जहाँ दलित वोटों के बिना कोई जीत ही नहीं सकता। जैसे मुज़फ्फरनगर में ही 3.8 लाख दलित वोट हैं, इसी प्रकार सहारनपुर मेरठ नगीना, आगरा, पंजाब में जालन्धर होशियार,हरियाणा में सिरसा सोनीपत व अम्बाला, बिहार में कैमूर व सासाराम जहाँ से बाबू जगजीवनराम जी लड़ते थे जो कभी नहीं हारे जोकि एक विश्व रिकॉर्ड है। महाराष्ट्र में अमरावती सांगरोली व अन्य राज्यों में उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल शामिल हैं जहाँ हमारी आबादी बहुत है और सीटों को जीतने में एकतरफा मदद करती है। ये एग्जिट पोल जो बीजेपी अपने मीडिया मित्रों द्वारा एक मोहाल बना कर दिखाया जा रहा है। यह एक षडयंत्र द्वारा सोची समझी चाल है ताकि दलित प्रधानमंत्री बनने से रोका जाए क्योंकि अबकी बार फिर दलित प्रधानमंत्री बनने का मौका है। लेकिन पहले ही ऐसे लोगों द्वारा भृम फैला कर दलित प्रधानमंत्री ना बने ऐसा प्रयास किया जा रहा है। लेकिन याद रखना दलित समाज अपने हको के लिए आखिरी दम तक लड़ेगा और हर बार लड़ेगा। ये देश हमारा है अब अन्नाये सहन नहीं करेगें।















