दलाई लामा को जेड श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने का फैसला उनकी बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए लिया गया है। चीन समर्थित तत्वों से खतरे की आशंका और हालिया खुफिया रिपोर्टों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। भारत सरकार ने हमेशा उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, और अब 33 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ यह और भी मजबूत हो गई है।
दलाई लामा का जीवन और उनकी गतिविधियाँ न केवल तिब्बती समुदाय बल्कि वैश्विक शांति और मानवाधिकारों के लिए भी महत्वपूर्ण रही हैं। उनका 1959 में भारत आगमन और तिब्बतियों के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई दशकों से जारी है। 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद से वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक चर्चित हुए हैं।
जुलाई में वह 90 वर्ष के हो जाएंगे, और उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय में तिब्बत वापस लौटने की इच्छा व्यक्त की है। यह चीन और तिब्बती समुदाय के बीच एक संवेदनशील विषय बना हुआ है। भारत की ओर से उनकी सुरक्षा को लेकर लिए गए इस नए फैसले से यह साफ है कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।















