वारिसों पर कांग्रेस सख्त, दिग्गजों के बेटी-बेटियों को नहीं मिले टिकट

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने इस बार एक बड़ा और सख्त संदेश दिया है। पार्टी ने दिग्गज नेताओं के पुत्र-पुत्रियों को टिकट न देकर यह साफ कर दिया है कि अब परिवारवाद पर अंकुश लगाने की नीति पर अमल शुरू हो चुका है। कांग्रेस की इस नई रणनीति ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है, क्योंकि लंबे समय से पार्टी में टिकट वितरण में ‘वंशवाद’ हावी रहा है।

लोकसभा की पूर्व स्पीकर और वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री मीरा कुमार ने अपने बेटे अंशुल अविजीत के लिए टिकट की मांग की थी। अंशुल को सासाराम या आस-पास की किसी सुरक्षित सीट से उतारने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन हाईकमान ने उनकी दलील नहीं मानी। इसी तरह, बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा के पिता और चार बार के विधायक अजीत शर्मा ने भी अपनी बेटी को कांग्रेस के टिकट पर राजनीति में उतारने के लिए भरसक प्रयास किए, मगर पार्टी ने उन्हें भी साफ इंकार कर दिया।

कांग्रेस के इस फैसले को संगठन में नए चेहरों को मौका देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान अब जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देना चाहता है ताकि संगठन को नई ऊर्जा मिल सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि अब टिकट केवल वंश के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता और मेहनत के आधार पर मिलेगा।

बिहार में कांग्रेस की यह नीति पार्टी के अंदर सुधार और नई राजनीतिक संस्कृति की ओर एक संकेत मानी जा रही है। हालांकि इससे कई पुराने नेताओं के परिवारों में असंतोष भी देखा जा रहा है, लेकिन पार्टी का मानना है कि यह बदलाव संगठन को दीर्घकाल में मजबूत करेगा।

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