चित्तौड़गढ़ में मकर संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक खेलों का आकर्षण घटते हुए दिखाई दे रहा है। हर साल मकर संक्रांति के दौरान सितौलिया, पतंगबाजी और गिल्ली डंडा जैसे खेलों का आयोजन होता था, जो स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बने हुए थे। लेकिन इस वर्ष युवाओं में इन खेलों के प्रति रुचि में कमी देखी गई। गत वर्षों में इन खेलों की धूम होती थी, लेकिन इस बार उनकी आवाजें कम सुनाई दीं। चित्तौड़गढ़ में मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी और फल का दान पुण्य किया गया, परंतु पारंपरिक खेलों के प्रति युवा वर्ग का आकर्षण घटता जा रहा है, यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है।















