कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 32,000 शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए उनकी नौकरियां रद्द करने के एकल पीठ के फैसले को पलट दिया है। खंडपीठ ने कहा कि ये शिक्षक पिछले नौ साल से सेवा दे रहे हैं, ऐसे में इतनी लंबी अवधि के बाद नौकरी से हटाना न केवल अनुचित होगा बल्कि इससे सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर गंभीर प्रतिक्रियाएं भी उत्पन्न होंगी। अदालत ने साफ किया कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कुछ विवाद सामने जरूर आए थे, लेकिन इंटरव्यू प्रक्रिया में खामियों के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसके अलावा, सीबीआई जांच में भी किसी शिक्षक पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया। ऐसे में सभी को दोषी ठहराकर नौकरियों से हटाना न्यायसंगत नहीं होगा। अदालत ने माना कि यदि इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों को एक साथ हटाया जाता, तो इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था और हजारों परिवारों की आजीविका पर पड़ता। फैसले के बाद शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने कहा कि यह सत्य और न्याय की जीत है। इस निर्णय ने उन परिवारों की चिंताएं दूर कर दी हैं जो वर्षों से इस अनिश्चितता में जी रहे थे। शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने ईमानदारी से अपनी सेवा दी है और अदालत के इस फैसले ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया है। खंडपीठ का यह निर्णय राज्य के शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता और भरोसे को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
अदालत ‘घूम-घूम कर पूछताछ’ नहीं कर सकती
खंडपीठ ने आज कहा कि जब अदालत ने फैसला लिया तो पूरे मामले पर विचार करना जरूरी था. जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती ने कहा, कोर्ट ‘घूम-घूम कर पूछताछ’ नहीं कर सकता. दूसरी बात जो लोग इतने लंबे समय से नौकरी कर रहे थे, उन्हें दी गई शिक्षा के प्रकार पर कोई सवाल नहीं उठाया गया.
इस बात का कोई सबूत नहीं है: हाई कोर्ट
कोर्ट ने कहा, तीसरी बात जब साक्षात्कार प्रक्रिया चल रही थी, तो इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वहां मौजूद परीक्षक ने पैसे लेकर अतिरिक्त अंक दिए.नतीजतन इंटरव्यू प्रक्रिया में पूरी गड़बड़ी के बारे में कुछ कहा ही नहीं जा सकता. जिन लोगों ने केस दायर किया था, उनमें से कोई भी काम नहीं कर रहा था. इसलिए जो लोग पास नहीं हुए, उनके लिए पूरी प्रक्रिया को बर्बाद नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को खारिज कर दिया.
क्या है पूरा मामला
2014 में प्राथमिक भर्ती की अधिसूचना जारी हुई थी. फिर टीईटी परीक्षा हुई. उसके आधार पर दो बार भर्ती प्रक्रिया हुई. 42,500 से ज़्यादा शिक्षकों की भर्ती हुई. उस भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगे. कलकत्ता हाई कोर्ट में मामला दायर किया गया. 12 मई, 2023 को तत्कालीन हाई कोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय ने 32,000 अप्रशिक्षित शिक्षकों को बर्खास्त करने का आदेश दिया.प्राथमिक विद्यालय में भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई शिकायतें दर्ज की गईं. वादी पक्ष ने आरोप लगाए–
- 2016 के भर्ती कानून का पालन नहीं किया गया.
- भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ.
- भर्ती प्रक्रिया में कोई चयन समिति नहीं थी. एक थर्ड पार्टी एजेंसी ने पैनल का गठन किया था.
- योग्यता परीक्षा नहीं ली गई. योग्यता परीक्षण के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं थे.
- अतिरिक्त अंक देकर नौकरियां दी गईं. बोर्ड के पास कट-ऑफ अंकों की सही जानकारी नहीं थी.















