अयोध्या:5 साल बाद अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का क्या हुआ?

अयोध्या में धन्नीपुर मस्जिद निर्माण परियोजना को लेकर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा गठित ‘इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन’ (IICF) ने निर्माण कार्य में आ रही रुकावटों और धन की कमी को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है।

मौजूदा स्थिति और निर्णय

  • समिति भंग: फाउंडेशन ने 19 सितंबर को हुई बैठक में चार समितियों—प्रशासनिक समिति, वित्त समिति, विकास समिति (मस्जिद मोहम्मद बिन अब्दुल्ला), और मीडिया एवं प्रचार समिति—को भंग कर दिया है।
  • वित्तीय संकट: अब तक केवल ₹1 करोड़ का चंदा जुटा पाना परियोजना की धीमी प्रगति का बड़ा कारण है।
  • एफसीआरए मंजूरी: विदेशी फंडिंग प्राप्त करने के लिए FCRA (विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम) के तहत केंद्र से आवश्यक मंजूरी प्रक्रिया तेज करने की कोशिश हो रही है।

मस्जिद निर्माण की प्रगति

  • सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद धन्नीपुर गांव में 5 एकड़ भूमि मस्जिद निर्माण के लिए आवंटित की गई थी।
  • लेकिन पिछले चार वर्षों में प्रगति नाममात्र ही रही है।
  • इस बीच, राम जन्मभूमि पर राम मंदिर लगभग तैयार हो गया है और 22 जनवरी, 2024 को राम लला की प्राणप्रतिष्ठा संपन्न हो चुकी है।

फाउंडेशन की योजना

  • धन संग्रह के नए तरीकों को अपनाने और कार्य में तेज़ी लाने के लिए IICF का पुनर्गठन किया जाएगा।
  • विदेशी चंदे की प्रक्रिया में आने वाली रुकावटों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

नए प्रयास की आवश्यकता

मस्जिद निर्माण में देरी और वित्तीय संकट को देखते हुए, यह जरूरी है कि फाउंडेशन न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और समर्थन प्राप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए।

यह परियोजना न केवल भारत के संविधान के फैसले का पालन करती है, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द्र का प्रतीक भी है। ऐसे में इसकी सफलता के लिए समर्पित प्रयास की जरूरत है।

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