मुजफ्फरनगर के विकास खंड बघरा में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के कार्यक्रम में बड़े घोटाले और अनियमितताओं का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है।गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए चलाई जा रही प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम के नाम पर खंड विकास कार्यालय में दलालों के माध्यम से पैसे लेकर जोड़ों का नाम योजना में शामिल कराया गया। इस पूरे मामले का एक कथित वीडियो भी सामने आया है, जिसमें रिश्वतखोरी की बात सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार खंड विकास कार्यालय बघरा में कुछ कथित दलालों को बैठाकर पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही थी। बताया जा रहा है कि विकास खंड अधिकारी (बीडीओ) बघरा और समाज कल्याण विभाग के एडीओ की मौजूदगी में दलालों के जरिए वर-वधुओं के परिवारों से पैसे लेकर उन्हें योजना का लाभ दिलाने की बात कही जा रही थी। चर्चा है कि एक-एक जोड़े से करीब दस हजार रुपये तक की रकम वसूली गई, जिसके बाद उनका विवाह सामूहिक कार्यक्रम में कराया गया। जैसे ही इस कथित लेन-देन का वीडियो सामने आया, पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया और मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया।मामले में सबसे बड़ा सवाल विवाह के आंकड़ों को लेकर खड़ा हो रहा है। जानकारी के मुताबिक योजना से संबंधित दस्तावेजों और फाइलों में कुल 52 जोड़ों को पात्र दिखाया गया था, जबकि कार्यक्रम स्थल पर केवल 43 जोड़ों का ही विवाह सम्पन्न कराया गया। बताया जा रहा है कि शेष जोड़ों को कागजों में अनुपस्थित दर्शा दिया गया, जबकि कुछ लोग मौके पर मौजूद होने का दावा कर रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बाकी नौ जोड़ों को योजना का लाभ क्यों नहीं मिला और उनके नाम किस आधार पर हटाए गए।इसके अलावा सामूहिक विवाह योजना के तहत मिलने वाले घरेलू सामान और सहायता सामग्री के वितरण में भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई पात्र लाभार्थियों को अपात्र बताकर योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया, जबकि कुछ मामलों में वितरण प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि यदि गरीब बेटियों के विवाह के लिए चलाई जा रही सरकारी योजना में भी भ्रष्टाचार हो रहा है, तो यह न केवल सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है बल्कि गरीबों के अधिकारों के साथ भी बड़ा अन्याय है। लोगों ने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और इसमें शामिल दलालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हो सकें।















