इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के अनुचित प्रयोग पर जताई चिंता, अधिकारियों को ट्रेनिंग देने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट के अनुचित प्रयोग को लेकर सख्त टिप्पणी की है। हाल ही में पांच व्यक्तियों ने गैंग चार्ट तैयार करने के तरीके को चुनौती दी थी, जिसमें यह तर्क दिया गया कि गैंग चार्ट 2021 के नियमों के अनुसार तैयार नहीं किया गया था। इस मामले की सुनवाई करते हुए, जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अरूण कुमार सिंह की डबल बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे अधिकारियों को ट्रेनिंग दें या क्रैश कोर्स के लिए भेजें ताकि वे गैंग चार्ट को सही तरीके से तैयार करना सीख सकें।

हाईकोर्ट ने निर्दोष व्यक्तियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाने पर चिंता जताई और कहा कि निर्दोषों का उत्पीड़न एक बड़े पाप के समान है। कोर्ट ने गैंगस्टर प्रक्रिया का पालन किए बिना गैंग चार्ट तैयार करने पर नाराजगी जताई और कहा कि उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर अधीनियम 2021 की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है।

धार्मिक ग्रंथों का दिया हवाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा, ऋग्वेद, बाइबिल और कुरान निर्दोष लोगों के उत्पीड़न पर रोक लगाते हैं. साथ ही हाई कोर्ट ने अधिकारियों को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना गैंगस्टर अधिनियम लागू करने के लिए फटकार लगाई है. कोर्ट ने उचित गैंग चार्ट तैयार न करने के लिए सरकारी अधिकारियों की भी की तीखी आलोचना की है. अदालत ने कहा, गैंग चार्ट तैयार करने में अधिकारी विवेक का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. सरकार इन्हें ट्रेनिंग दें. प्रमुख सचिव और सचिव गृह से हाई कोर्ट ने कहा कि निदेर्शों का पालन कराया जाए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नैतिक न्याय पर जोर दिया है.

बाइबल का दिया हवाला

हाई कोर्ट ने बाइबल का भी हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक ग्रंथ बाइबल में लिखा है कि “झूठे आरोप से कोई लेना-देना न रखें और निर्दोष या ईमानदार व्यक्ति को मौत की सजा न दें. महोबा के अब्दुल लतीफ, इटावा के हेतराम और बिजनौर के रितिक की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट ने अलग-अलग आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए. हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी निर्दोष को गैंगस्टर के मामले में न फंसाया जाए.

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