सिरोही जिले के नंदगांव (केसुआ) स्थित मनोरमा गौ-लोक तीर्थ की पावन व ऐतिहासिक धरती पर 30 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक अखिल भारतीय राजपुरोहित अधिवक्ता, न्यायाधीश व न्यायिक कर्मचारी महाअधिवेशन भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन गोऋषि दत्तशरणानंदजी महाराज एवं हजारों गौमाताओं की साक्षी में आयोजित किया गया। महाअधिवेशन का शुभारंभ राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर के न्यायाधिपति मुकेश राजपुरोहित तथा संत दंडीस्वामी देवानंदजी महाराज द्वारा दीप प्रज्वलन, गौ पूजन और ध्वजारोहण के साथ हुआ।
उद्घाटन सत्र में वर्तमान समय के अत्यंत प्रासंगिक विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग, दुरुपयोग, उससे उत्पन्न कानूनी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। न्यायाधिपति मुकेश राजपुरोहित ने कहा कि एआई न्यायिक प्रक्रिया को सरल, त्वरित और पारदर्शी बना सकता है, लेकिन इसके दुरुपयोग से गोपनीयता, नैतिक मूल्यों और न्याय व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है। इसलिए एआई के लिए स्पष्ट नियम, नैतिक दिशानिर्देश और विधिक नियंत्रण आवश्यक हैं।गौऋषि दत्तशरणानंदजी महाराज ने वेदलक्षणा गौ माता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गौ माता देश, धर्म और सनातन संस्कृति की आधारशिला है। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष हुकमसिंह राजपुरोहित ने कहा कि स्थायी लोक अदालत आम जनता को सुलभ और त्वरित न्याय प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है।
महाअधिवेशन में 40 वर्षों से अधिक समय तक निरंतर वकालत करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सम्मानित किया गया, साथ ही वर्तमान वर्ष में वकील मंडल चुनाव में निर्वाचित पदाधिकारियों को भी सम्मान मिला। समापन समारोह संत सत्यानंदजी महाराज और अतिरिक्त महाअधिवक्ता नरेंद्रसिंह राजपुरोहित के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। वक्ताओं ने गो-संरक्षण को धार्मिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक महत्व से जुड़ा विषय बताते हुए समाज की जागरूकता और सहभागिता पर जोर दिया। इस अवसर पर करीब 500 अधिवक्ताओं की भागीदारी रही और अनेक समाजबंधुओं ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।















