राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर वराडा के राउमावि में बच्चों को दी गई एल्बेंडाजोल की खुराक

सिरोही जिले के वराडा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक के कुल 260 विद्यार्थियों में से 242 बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी गई। शेष 18 विद्यार्थियों को आगामी 29 अगस्त को आयोजित होने वाले मॉप-अप डे पर यह खुराक दी जाएगी। विद्यालय के मीडिया प्रभारी संजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्यक्रम भारत सरकार की स्वास्थ्य पहल के अंतर्गत प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को कृमि संक्रमण यानी पेट के कीड़ों से मुक्त करना है। शर्मा ने कहा कि इस पहल का मकसद केवल कृमि संक्रमण को समाप्त करना ही नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना भी है।

उन्होंने आगे बताया कि यह खुराक आयु वर्ग के अनुसार विभागीय निर्देशों के तहत विद्यालय के समस्त स्टाफ की उपस्थिति में दी जाती है। एल्बेंडाजोल की यह दवा बच्चों के शरीर में मौजूद हानिकारक कृमियों को नष्ट कर उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर ले जाती है। इस अभियान से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे वे बीमारियों से बचकर पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। यह दवा केवल विद्यालयों में ही नहीं, बल्कि आंगनवाड़ी केंद्रों में भी बच्चों को पिलाई जाती है।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के संस्थाप्रधान भंवरलाल पुरोहित ने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी संदेश भी दिया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे हमेशा खाने से पहले हाथों को अच्छे से धोएं, घर में उपयोग की जाने वाली सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें और व्यक्तिगत स्वच्छता पर पूरा ध्यान दें। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अपनाने से कई बीमारियों से बचा जा सकता है और शरीर स्वस्थ रहता है।

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और स्टाफ का भी विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में गोवाराम मेघवाल, नरेश आर्य, रमेश कुमार, एलके घांची, जोगेंद्र कुमार, बीएल मुंगिया, उमेश कुमार, महेंद्र सिंह, भरत पुरोहित, मनीषा माली, दीपिका पुरोहित और खुशबू ने सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने मिलकर विद्यार्थियों को खुराक पिलाने की प्रक्रिया को सफल बनाया और बच्चों को जागरूक किया।राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस जैसे अभियानों से ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों को बड़ा लाभ मिलता है। अधिकांशतः यह देखा गया है कि कृमि संक्रमण से पीड़ित बच्चों में कुपोषण, खून की कमी और पढ़ाई में कमजोरी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। ऐसे में एल्बेंडाजोल की खुराक बच्चों को इन समस्याओं से बचाकर उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक बनती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यदि नियमित रूप से यह खुराक बच्चों को दी जाए तो उनमें कृमि संक्रमण की संभावना काफी कम हो जाती है।इस अभियान से न केवल विद्यार्थियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ती है बल्कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों की देखभाल और स्वच्छता के महत्व की समझ मिलती है। इस तरह के कार्यक्रमों से समाज में स्वास्थ्य संबंधी सकारात्मक संदेश पहुंचता है और भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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