मुजफ्फरनगर में कृषि विभाग ने दी रबी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी सलाह

मुजफ्फरनगर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने किसानों को रबी की प्रमुख फसलों—गेहूं, राई/सरसों और आलू—में बीजशोधन, भूमिशोधन तथा कीट और रोग नियंत्रण के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसान भाई नियमित रूप से अपनी फसलों की निगरानी करें ताकि कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखते ही समय पर नियंत्रण किया जा सके। इससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है और उत्पादन में भी वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि गेहूं की बुवाई से पहले बीजशोधन और भूमिशोधन अवश्य किया जाए। इसके लिए बीजशोधन में कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज और ट्राइकोडर्मा 4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज का प्रयोग किया जा सकता है। भूमिशोधन के लिए ट्राइकोडर्मा 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत डब्ल्यूजी + मैट सल्फ्यूरॉन मिथाइल 20 डब्ल्यूजी की अनुशंसित मात्रा को प्रति एकड़ 250 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जाए।

राहुल सिंह तेवतिया ने बताया कि गेहूं में पीली गेरूई रोग के लक्षण सर्वप्रथम पत्तियों पर पीले रंग की धारियों के रूप में दिखाई देते हैं, जिन्हें छूने पर पीले पाउडर का एहसास होता है। ऐसे लक्षण दिखने पर प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी की 200 मिली मात्रा को 250 से 300 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। रोग की गंभीरता को देखते हुए दूसरा छिड़काव 10 से 15 दिन के अंतराल पर दोहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बारिश या कोहरे की स्थिति में किसी भी रसायन का छिड़काव न करें।

राई और सरसों की फसल के बारे में उन्होंने बताया कि तापमान में गिरावट के साथ इन फसलों में माहू (एफिड्स) कीट के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। यदि कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक (यानी 5 प्रतिशत पौधे प्रभावित) हो जाए, तो किसान एजाहिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 1 लीटर, हाई मैथोएट 30 प्रतिशत ईसी 400 मिलीलीटर या क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी 400 मिलीलीटर में से किसी एक दवा को 200 से 250 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

आलू की फसल में अगैती और पछेती झुलसा रोग के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। रोग की स्थिति में कापर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 1 किलोग्राम, मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 800 ग्राम या जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 800 ग्राम को 250 से 300 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर फसलों की देखभाल और वैज्ञानिक पद्धति से की गई सिंचाई एवं छिड़काव से किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

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