मुजफ्फरनगर में काली नदी पूर्वी के संरक्षण और जल प्रदूषण को रोकने के उद्देश्य से कृषि एवं सामाजिक वानिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने बताया कि विकास खण्ड खतौली के अंतर्गत काली नदी पूर्वी के किनारे बसे दस गांवों—अंतवाडा, पलडी, रसूलपुर कैलोरा, खोकनी, वाजिदपुर खुर्द, गालिबपुर, जन्धेडी जाटान, जसौला, सिकन्दरपुर खुर्द और कढली—में नदी संरक्षण को लेकर व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस संबंध में प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक कर नदी के प्रदूषण और उसके समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि इन गांवों के आसपास होने वाली खेती में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक वर्षा के पानी के साथ बहकर काली नदी पूर्वी में पहुंच जाते हैं। इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है और जलीय जीव-जंतुओं व पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है। अधिकारियों ने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो नदी का पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए नदी के किनारे स्थित कृषि क्षेत्रों में खेती के तरीकों में बदलाव लाने पर जोर दिया गया।
उप कृषि निदेशक ने बताया कि नदी किनारे के किसानों को जागरूक कर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने तथा जैविक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही नदी के किनारे से बहकर आने वाले वर्षा जल यानी वाटर रनऑफ को रोकने के लिए भी विशेष उपाय किए जाएंगे, ताकि खेतों से बहकर आने वाले रसायन सीधे नदी में न पहुंच सकें। इसके लिए तकनीकी उपायों और जागरूकता कार्यक्रमों को भी योजना में शामिल किया जाएगा।
बैठक में यह भी तय किया गया कि काली नदी पूर्वी के जल के नमूने लेकर उनका वैज्ञानिक विश्लेषण कराया जाएगा, ताकि जल की गुणवत्ता और प्रदूषण के स्तर का सही आकलन किया जा सके। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी उपायों को ध्यान में रखते हुए आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विस्तृत कार्ययोजना और परियोजना तैयार की जाएगी, जिससे काली नदी पूर्वी के संरक्षण, जल की गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।















