मुजफ्फरनगर। त्यौहारों के मौसम में मिलावटी और बासी खाद्य पदार्थों की बिक्री लोगों की सेहत के लिए खतरा बनती जा रही है। मोरना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां नवरात्र व्रत के दौरान कुट्टू के आटे से बनी कचौरी खाने के बाद एक ही परिवार के कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए। आनन-फानन में पीड़ितों को मोरना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें फूड पॉइजनिंग का शिकार बताया। बताया गया है कि भोपा थाना क्षेत्र के गांव मोरना निवासी सत्येंद्र पाल के परिवार ने नवरात्र का व्रत रखा हुआ था। शनिवार देर शाम परिवार के सदस्यों ने व्रत के दौरान कुट्टू के आटे से तैयार कचौरियों का सेवन किया। खाना खाने के कुछ ही समय बाद परिवार के सदस्यों को अचानक चक्कर आने लगे और इसके बाद उल्टियां व दस्त की शिकायत शुरू हो गई। देर रात तक हालत बिगड़ती देख परिजन घबरा गए और रविवार सुबह सत्येंद्र पाल की पत्नी सुधा (38 वर्ष) और पुत्री खुशी (15 वर्ष) को मोरना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया। अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. अनिल कौशिक ने बताया कि दूषित या खराब कुट्टू के आटे के सेवन से मरीजों को फूड पॉइजनिंग हुई है।
उन्होंने बताया कि मरीजों का उपचार किया जा रहा है और फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। अस्पताल में उपचार के दौरान डॉ. श्रुति, लैब टेक्नीशियन अशोक कुमार और वार्ड ब्वॉय नरेंद्र कुमार भी ड्यूटी पर तैनात रहे और मरीजों की देखभाल में जुटे रहे। घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान सर्वेंद्र राठी उर्फ मिंटू भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार का हालचाल जाना। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में दहशत और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाजारों में पुराने और फफूंद लगे कुट्टू के आटे को पीसकर बेचा जा रहा है, जिससे व्रत के दौरान लोग बीमार पड़ रहे हैं। लोगों ने खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि बाजारों में कुट्टू के आटे की दुकानों पर छापेमारी कर सैंपल जांच कराई जाए और दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ग्राम प्रधान का कहना है कि त्यौहारों के मौके पर मिलावटी या खराब खाद्य सामग्री बेचना सीधे तौर पर लोगों के जीवन से खिलवाड़ है और प्रशासन को इस पर तुरंत सख्त कदम उठाने चाहिए।















