मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच अमेरिका ने ईरान के वॉरशिप को निशाना बनाया, जिसमें 87 लोगों की मौत हो गई है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह हमला अमेरिका की पनडुब्बी ने किया और ईरानी जहाज आईरिस डेना (IRIS Dena) उनका टारगेट था. श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संसद में बताया कि इस जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे. यह जहाज श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर डूबा. डूबने से पहले जहाज आईरिस डेना ने मदद का मैसेज भेजा था. यह जहाज ईरान की माउज क्लास फ्रिगेट IRIS देना था.अमेरिकी रक्षा विभाग ने यह भी बताया कि इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान का एक और युद्धपोत भी डुबोया गया था. आईरिस डेना हाल ही में भारत में हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 और बंगाल की खाड़ी में हुए नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था. दो हफ्ते पहले यह जहाज विशाखापट्टनम बंदरगाह पर भी आया था और भारतीय नौसेना ने उसका स्वागत किया था.
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— Department of War 🇺🇸 (@DeptofWar) March 4, 2026
🇮🇳🤝🇮🇷Khoshomadid! #IndianNavy welcomes IRIS Dena, a Moudge Class Frigate of the Iranian Navy at #Visakhapatnam, #AndhraPadesh for participation in the Multilateral Naval Exercise #MILAN2024.
This is a reflection of our shared historical & cultural linkages. 🌊⚓🚢… pic.twitter.com/TTbWgqeuGM
— Eastern Naval Command 🇮🇳 (@IN_HQENC) February 19, 2024
श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना
श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. अब तक 32 लोगों को बचा लिया गया है और कई शव समुद्र से निकाले गए हैं. घायलों का इलाज गाले शहर के सरकारी अस्पताल में किया जा रहा है. श्रीलंका की नौसेना ने कहा कि जब उनकी टीम मौके पर पहुंची तो वहां सिर्फ तेल फैला हुआ दिखा और जहाज नजर नहीं आया. श्रीलंका की सेना ने बताया कि घटना श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र से बाहर हुई, लेकिन फिर भी श्रीलंका ने मदद की जिम्मेदारी निभाई. उस समय वहां कोई दूसरा जहाज या विमान नहीं देखा गया था. पहले यह साफ नहीं था कि जहाज कैसे डूबा, लेकिन बाद में अमेरिकी रक्षा मंत्री ने पुष्टि की कि यह हमला अमेरिकी पनडुब्बी ने किया. इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि सैन्य कार्रवाई थी.















