दुबई में अमेरिकी कॉन्सुलेट के पास धमाका,

मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव अब खुले संघर्ष में बदलता दिख रहा है. हालिया घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है और आम लोगों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है.इसी बढ़ते तनाव के बीच दुबई से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई, जिसने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

मंगलवार देर रात दुबई में अमेरिकी कॉन्सुलेट के नजदीक एक संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ. बताया जा रहा है कि ड्रोन कॉन्सुलेट के पास स्थित पार्किंग क्षेत्र में गिरा, जिससे वहां आग लग गई. स्थानीय लोगों ने तेज धमाके की आवाज सुनी और कुछ ही देर में आसमान में धुएं और आग की लपटें दिखाई देने लगीं.घटना के तुरंत बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं. आसपास की सड़कों को बंद कर दिया गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया. सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें काला धुआं साफ दिखाई दे रहा है.

अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान

घटना की पुष्टि करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ड्रोन हमले में कॉन्सुलेट के स्टाफ को कोई नुकसान नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि ड्रोन पार्किंग इलाके में गिरा था, जिससे आग लगी. रुबियो ने इस हमले को ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने राजनयिक परिसरों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है और ऐसे हमलों का जवाब देने के लिए तैयार है.

रियाद और कुवैत में भी हमले

दुबई की घटना के कुछ ही समय बाद सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास के पास दो ड्रोन हमलों की खबर सामने आई. इन हमलों से हल्की आग लगी, जिसे समय रहते बुझा दिया गया. इसके अलावा कुवैत में भी अमेरिकी दूतावास के आसपास हमला हुआ, जहां आसमान में काले धुएं का गुबार देखा गया. इन घटनाओं से साफ है कि ईरान खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है.

यूएई का रुख

संयुक्त अरब अमीरात ने साफ किया है कि वह इस संघर्ष में शामिल नहीं है. विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि यूएई ने अपनी जमीन, समुद्री सीमा या हवाई क्षेत्र को किसी भी देश के खिलाफ हमले के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है. सरकार ने यह भी बताया कि अब तक 1,000 से अधिक हमलों का सामना करने के बावजूद उसने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है. यूएई ने अपने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात दोहराई है.

पूरे क्षेत्र में बढ़ती चिंता

मध्य पूर्व के कई देशों में तनाव का असर साफ दिख रहा है. अमेरिका ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है. हालात ऐसे हैं कि छोटे-छोटे हमले भी बड़े टकराव का रूप ले सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं रुका, तो इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. फिलहाल, खाड़ी क्षेत्र हाई अलर्ट पर है और दुनिया की नजरें इस बढ़ते संकट पर टिकी हुई हैं.

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