तेहरान के ट्रैफिक कैमरे थे हैक, इजरायली मोसाद की हाईटेक इंटेलिजेंस ने खामेनेई को कैसे मारा?

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई जब राजधानी तेहरान में अपने किलेनुमा दफ्तर में शीर्ष अधिकारियों से मिल रहे थे, तभी अमेरिका और इजरायल ने हमला बोल दिया।इस हमले में अली खामेनेई के साथ ही कई शीर्ष अधिकारी मारे गए। यह हमला रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में किया गया था, जिसकी ईरान में किसी ने शायद ही कल्पना की होगी। लेकिन इजरायल और अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पास 86 साल के खामेनेई के बारे में हर जानकारी थी। उन्हें यह तक पता था कि खामेनेई अपने ऑफिस में ठीक किस समय होंगे और उनके साथ कौन-कौन आएगा।

तेहरान के सभी ट्रैफिक कैमरे थे हैक

फाइनेंशियल टाइम्स ने मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से बताया है कि इजरायली इंटेलिजेंस ने तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों को सालों से हैक कर लिया था। उसकी तस्वीरें एन्क्रिप्ट करके तेल अवीव और दक्षिणी इजरायल के सर्वर पर भेजी जा रही थीं। इसमें एक कैमरे का एंगल बहुत काम का साबित हुआ, जिससे पाश्चर स्ट्रीट में खामेनेई के कड़े सुरक्षा वाले कंपाउंड के आम हिस्सा की झलक मिली।इससे यह पता लगाने में मदद मिली कि सीनियर अधिकारी, वफादार बॉडीगार्ड अपनी कार कहां पार्क करते हैं। इस ऑपरेशन में आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस की भी मदद ली गई, जिसके एल्गोदिरम ने इन सिक्योरिटी गार्ड के पते, ड्यूटी के घंटे, काम पर जाने के रास्ते के साथ ही यह भी पता लगाया कि उन्हें किसकी सुरक्षा और ट्रांसपोर्ट का काम सौंपा गया था।

तेहरान के चप्पे-चप्पे की जानकारी

एक इजरायली इंटेलिजेंस अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘हम तेहरान को वैसे ही जानते थे जैसे यरुशलम को जानते हैं। जब आप किसी जगह को उतनी ही अच्छी जगह से जानते हों जितना आप उस गली को जानते हैं, जहां आप बड़े हुए हैं, तो आप एक भी ऐसी चीज नोटिस करते हैं, जो जगह से हटकर हो।’

इजरायल ने ईरान में अपनी खुफिया पकड़ पिछले साल जून में ही दिखा दी थी, जब 12 दिनों के युद्ध की शुरुआत में ही इसने एक दर्जन से ज्यादा ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की हत्या कर दी। वहीं, साइबर हमलों, कम रेंज के ड्रोन और ईरान के बाहर से दागे गए हथियारों से ईरान के एयर डिफेंस को नाकाम कर दिया। एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने पहले उनकी आंखें ली थीं।’

इजरायल की स्पैरो मिसाइल

इजरायल ने पहले जून और अब ताजा हमले में स्पैरो नाम की खास मिसाइल का इस्तेमाल किया, जो 1000 किमी की दूरी पर मौजूद डाइनिंग टेबल जितने छोटे लक्ष्य को निशाना बना सकती है। यह मिसाइल ईरान के किसी भी एरियल डिफेंस सिस्टम की पहुंच से बहुत दूर है।

खामेनेई को शुरुआत में ही क्यों मारा?

इजरायली अधिकारियों के अनुसार युद्ध शुरुआत में ही खामेनेई को मारने का फैसला इसलिए किया गया क्योंकि बाद में उन्हें ढूढ़ना बहुत मुश्किल होता। ईरानी उन्हें बचाने के लिए सुरक्षित अंडरग्राउंड बंकरों में भेज देते। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि तनाव के समय में खामेनेई का बंकर में न होना अजीब था। उनके पास दो बंकर थे। अगर वे उसमें होते तो इजरायल अपने पास मौजूद बमों से उन तक नहीं पहुंच पाता। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि ईरान पर हमले की योजना महीनों पहले ही बनी थी, लेकिन ऑपरेशन में तब बदलाव किया गया गया जब अमेरिकी और इजरायली इंटेलिजेंस ने कन्फर्म किया कि खामेनेई और उनके सीनियर अधिकारी शनिवार सुबह कंपाउंड में मौजूद होंगे।

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