यूपी बजट 2026 से MSME को सशक्तिकरण की उम्मीद,

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) सेक्टर को लेकर औद्योगिक संगठन इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) ने बजट 2026 से बड़ी अपेक्षाएं जताई हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मुजफ्फरनगर जैसे औद्योगिक जिलों में MSME न केवल रोज़गार का प्रमुख साधन हैं, बल्कि निवेश और राजस्व वृद्धि में भी अहम भूमिका निभाते हैं। आईआईए का मानना है कि यदि बजट में इस सेक्टर को ठोस राहत और नीतिगत समर्थन मिला, तो प्रदेश की आर्थिक रफ्तार अपने आप तेज हो जाएगी।आईआईए ने सबसे पहले बिजली दरों को लेकर मांग रखी है। संगठन का कहना है कि औद्योगिक बिजली दरों में कम से कम 25 प्रतिशत की सब्सिडी दी जानी चाहिए और फिक्स्ड चार्ज को समाप्त किया जाए, ताकि छोटे उद्योगों पर बढ़ते उत्पादन खर्च का बोझ कम हो सके। इसके साथ ही ₹50 लाख तक के ऋण पर ब्याज अनुदान और गारंटी-फ्री लोन की सीमा बढ़ाने की मांग की गई है, जिससे नए और पुराने उद्यमी आसानी से पूंजी जुटा सकें।

बकाया भुगतान की समस्या को MSME सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए आईआईए ने मांग की है कि सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों को 45 दिनों के भीतर भुगतान के लिए बाध्य किया जाए। इसके अलावा राज्य सरकार की सभी खरीद प्रक्रियाओं में स्थानीय MSME को न्यूनतम 50 प्रतिशत प्राथमिकता देने की भी सिफारिश की गई है।GST को लेकर उद्योगों की परेशानी पर आईआईए ने कहा कि छोटे उद्योगों के लिए त्रैमासिक रिटर्न, सरल ऑडिट प्रक्रिया और अनावश्यक नोटिसों से राहत जरूरी है। संगठन ने प्रत्येक जिले में सस्ती औद्योगिक भूमि और रेडी-टू-यूज़ शेड कम किराये पर उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है, ताकि नए उद्योगों को शुरू करने में आसानी हो।

बंद और बीमार उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए वन टाइम सेटलमेंट और विशेष पैकेज की जरूरत बताते हुए आईआईए ने तकनीकी उन्नयन पर भी जोर दिया है। नई मशीनरी, ऑटोमेशन, सोलर और ऊर्जा बचत उपकरणों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की मांग की गई है। साथ ही एकल खिड़की प्रणाली को प्रभावी बनाते हुए सभी अनुमतियां 30 दिनों के भीतर देने और आग, दुर्घटना व प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के लिए सरकारी MSME बीमा योजना लागू करने की भी अपेक्षा जताई गई है।आईआईए का साफ कहना है कि MSME को मज़बूती देने से रोज़गार, निवेश और राजस्व में स्वतः वृद्धि होगी। बजट 2026 में इस सेक्टर को केवल राहत नहीं, बल्कि वास्तविक सशक्तिकरण मिलना चाहिए।

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