प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता वार्ता के पूरे होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह समझौता वैश्विक भलाई के लिए साझा समृद्धि का एक खाका है।यह समझौता ऐसे समय में स्थिरता देगा, जब दुनिया व्यवस्था उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है।प्रधानमंत्री ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता संपन्न किया है। भारत-ईयू विश्व व्यवस्था को स्थिरता प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए समुद्री क्षेत्र और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा।
96.6 प्रतिशत यूरोपीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ होगा कम
इस नए व्यापार समझौते में करीब 96.6 प्रतिशत यूरोपीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ घटाया जाएगा या पूरी तरह हटाया जाएगा। अभी कई चीजों पर 50 से 150 प्रतिशत तक टैक्स लगता है। इस समझौते के बाद कई मामलों में यह टैक्स शून्य से 20 प्रतिशत तक आ सकता है। ईयू के मुताबिक इस डील से यूरोपीय कंपनियों को हर साल करीब चार अरब यूरो की बचत होगी। वर्ष 2024 में इन क्षेत्रों से भारत का निर्यात कुल 35 अरब डॉलर था।
कार्यान्वयन के पहले दिन 33.5 अरब डॉलर पर टैरिफ हटा दिया जाएगा। बाकी पर यह तीन, पांच और सात वर्षों में शून्य हो जाएगा। फिलहाल भारत और यूरोपीय संघ के बीच करीब 136 अरब डॉलर का है। इस डील के लागू होने के बाद तीन से चार साल में यह आंकड़ा 200 अरब डॉलर के पार जा सकता है। सेवा क्षेत्र का व्यापार भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।
शराब, व्हिस्की और बीयर पर 130 फीसदी तक घटेंगे दाम
विदेशी शराब अब पहले के मुकाबले सस्ती हो सकती है। यूरोप से आने वाली बीयर पर टैक्स घटाकर आधा कर दिया गया है। वहीं स्पिरिट्स यानी हार्ड ड्रिंक्स पर टैक्स में भी बड़ी कटौती हुई है।
वाइन पर लगने वाला टैक्स भी अब काफी कम होगा। बीयर पर ड्यूटी 110 फीसदी से घटाकर 55 फीसदी कर दी गई है। वहीं स्पिरिट्स यानी व्हिस्की और स्कॉच पर ड्यूटी 150 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी कर दी गई है। तो वाइन पर भी ड्यूटी 150 फीसदी से घटाकर 20 से 30 फीसदी कर दी गई है।
विशाल समझौते का पैमाना
1.9 अरब लोगों पर होगा इस समझौते का असर
25 प्रतिशत हिस्सा भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक अर्थव्यवस्था का
30 प्रतिशत हिस्सा हैं विश्व की कुल जनसंख्या का
12 प्रतिशत हिस्सा बनाते दोनों वैश्विक व्यापार का
11,000 अरब अमेरिकी डॉलर है दोनों का व्यापार
प्रमुख बिंदु
22 वां मुक्त व्यापार समझौता भारत का
99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को तरजीही प्रवेश मिलेगा
3.8 प्रतिशत है ईयू को औसत शुल्क
0.1 प्रतिशत हो जाएगा भारत के लिए
155 में से 144 उपक्षेत्रों में भारत को मिलेगी पहुंच
102 क्षेत्रों में ईयू को मिलेगी व्यापारिक पहुंच
अभी क्या प्रक्रिया बाकी
समझौते को लागू होने से पहले ईयू की परिषद और यूरोपीय संसद की मंजूरी, कानूनी समीक्षा, अनुवाद और भारत की तरफ से भी अनुमोदन जरूरी होगा। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद ही यह समझौता प्रभाव में आएगा।
भारत ने किन सेक्टर्स को रखा बाहर
भारत ने डेयरी सेक्टर, सोया मील और अनाज पर किसी तरह की ड्यूटी छूट नहीं दी है। इसका मकसद घरेलू किसानों और छोटे उत्पादकों को सुरक्षित रखना है। वहीं यूरोपीय संघ ने भी अपने बीफ, मीट, पोल्ट्री और शुगर सेक्टर को इस डील से बाहर रखा है।
कारों पर टैक्स में बड़ी कटौती
ईयू से आने वाली कारों पर टैक्स को 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा।यह कटौती धीरे-धीरे लागू होगी। यह सुविधा हर साल सिर्फ 2.5 लाख गाड़ियों तक ही सीमित रहेगी यानी तय संख्या से ज्यादा कारों पर पुराना टैक्स ही लगेगा। फिलहाल 40,000 डॉलर से कम कीमत वाली गाड़ियों पर 70 प्रतिशत और इससे महंगी कारों पर 110 प्रतिशत तक टैक्स लिया जाता है।
ब्रिटेन से छह गुना ज्यादा मिली रियायत
ब्रिटेन के साथ हुए अलग समझौते में भारत ने सिर्फ करीब 37,000 कारों को ही ऐसी सुविधा दी थी। इस फैसले से भारत का सख्त माने जाने वाला कार बाजार यूरोपीय कंपनियों के लिए काफी हद तक खुल जाएगा और आने वाले समय में विदेशी कारों की मौजूदगी बढ़ सकती है।
एशिया में तीसरा देश बना भारत
इस डील के साथ भारत ईयू के साथ ऐसा समझौता करने वाला एशिया का तीसरा देश बन गया है। इससे पहले जापान और दक्षिण कोरिया ईयू के साथ एफटीए कर चुके हैं।
किसने क्या कहा
कोस्टा ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए दो अरब लोगों के बाजार के लिए अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी समझौता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-ईयू शिखर सम्मेलन दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत और यूरोपीय संघ भरोसेमंद भागीदारों के रूप में साथ खड़े हैं। हम यूक्रेन में संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति कायम करने में मदद के लिए आप (मोदी) पर भरोसा करते हैं।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत-यूरोप साझेदारी उस समय रणनीतिक निर्भरता को कम करेगी, जब वैश्विक व्यापार का तेजी से राजनीतिकरण और हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, हम तेजी से असुरक्षित होती दुनिया में अपने लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। लेयेन ने कहा कि भारत का उदय हुआ है और यूरोप इससे वास्तव में खुश है।















