राजगढ़-अलवर मेगा हाईवे मार्ग के मध्य स्थित कांदोली बाईपास पर केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह, वैभव गहलोत, आर्यन जुबेर खान, ललित यादव, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष योगेश मिश्रा सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। सभी नेताओं ने आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी मांग को जायज बताया और सरकार से शीघ्र समाधान की अपील की।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा आंदोलन पिछले कई दिनों से चल रहा है, लोग धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। जब राजगढ़ को केंद्रीय विद्यालय मिला है तो उसका निर्माण भी राजगढ़ में ही होना चाहिए। यदि सरकार के पास जमीन नहीं है तो उसे अधिग्रहित करे। उन्होंने डबल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सरकार को जमीन पर भी काम करना चाहिए। यदि सरकार रैणी में केंद्रीय विद्यालय देना चाहती है तो वहां दूसरा केंद्रीय विद्यालय स्वीकृत किया जाए, लेकिन राजगढ़ के हक को छीना नहीं जाना चाहिए।
नेताओं ने कहा कि इस आंदोलन में व्यापारी, किसान, मजदूर और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हैं, जो यह साबित करता है कि यह केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक मांग है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन का रवैया संवेदनहीन बना हुआ है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
आवाज मंच के मुकेश जैमन ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से राजगढ़ कस्बा पूरी तरह बंद है। इसके अलावा दो दिनों से महापड़ाव जारी है, जिसमें सैकड़ों लोग लगातार डटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन से वार्ता भी की गई, लेकिन किसी प्रकार का ठोस समाधान नहीं निकल सका। इससे आंदोलनकारियों में भारी नाराजगी है।
मुकेश जैमन ने आगे बताया कि शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते अब आंदोलन ने और उग्र रूप ले लिया है। मांग पूरी नहीं होने से आहत होकर वे आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक केंद्रीय विद्यालय को राजगढ़ में स्थापित करने का स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कुल मिलाकर कांदोली बाईपास पर चल रहा यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है और आने वाले दिनों में सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकता है।















