भारत में गॉल ब्लैडर यानी पित्त की थैली में स्टोन और उससे जुड़े कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। CCO जर्नल में प्रकाशित “Epidemiology of Gallbladder Cancer in India” नामक रिसर्च के अनुसार, दुनियाभर में गॉल ब्लैडर कैंसर के कुल मामलों में से 10 प्रतिशत सिर्फ भारत में पाए जाते हैं। यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रहा है। खराब खानपान, प्रदूषित पानी और अनदेखी इस बीमारी के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में करोड़ों लोग पित्त की पथरी से पीड़ित हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इसे मामूली समस्या समझकर इलाज नहीं कराते, जिससे जोखिम काफी बढ़ जाता है।
दिल्ली के MASSH हॉस्पिटल में मिनिमल एक्सेस सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. सचिन आंबेकर बताते हैं कि शरीर में मौजूद रेड ब्लड सेल्स के टूटने से बिलीरुबीन बनता है, जिसे लिवर सामान्य रूप से शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन कुछ लोगों में लिवर इस बिलीरुबीन को पूरी तरह बाहर नहीं कर पाता, जिसके कारण यह गॉल ब्लैडर में जमा होने लगता है और धीरे-धीरे छोटे-छोटे कण बनकर पथरी का रूप ले लेता है। शुरुआत में ये स्टोन बेहद छोटे होते हैं और कोई लक्षण नहीं दिखते, इसी वजह से लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।
डॉ. सचिन बताते हैं कि समय के साथ ये पथरी बढ़कर दर्द, उलटी, पेट में सूजन और पाचन संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकती है। कई मामलों में वर्षों तक अनदेखी की गई पथरी गॉल ब्लैडर को नुकसान पहुंचाते हुए कैंसर का कारण भी बन जाती है। हालांकि हर पथरी कैंसर में नहीं बदलती, लेकिन लंबे समय से मौजूद स्टोन और लक्षणों की उपेक्षा इस जोखिम को बढ़ा देती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पेट में लगातार दर्द, अपच, या बार-बार उलटी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए, ताकि गंभीर बीमारी से बचा जा सके।
पित्त की थैली कि पथरी कैंसर का रूप कैसे ले लेती है?
डॉ सचिन बताते हैं कि जब पथरी लंबे समय तक रहती है तो ये गॉल ब्लैडर की अंदर वाली परत में सूजन शुरू कर देती है. कुछ मामलों में ये सूजन बढ़ती रहती है. खासतौर पर अगर कोई पथरी पांच साल से अधिक है तो गॉल ब्लैडर में कैंसर बनने का रिस्क होता है. पथरी का साइज भी बड़ा रिस्क फैक्टर हैं. जिन लोगों में पथरी 10 एमएम से अधिक है उनको कैंसर का खतरा रहता है.
चिंता की बात यह है कि गॉल ब्लैडर की पथरी से कैंसर बनता है तो इसकी पहचान भी कई मरीजों में देरी से होती है. ऐसे केस आते हैं जिनमें मरीज को लंबे समय से पथरी थी और वह आयुर्वेदिक इलाज करा रहे थे. जब अचानक बहुत तेज दर्द हुआ तो सर्जरी के लिए आए. सर्जरी करके गॉल ब्लैडर तो निकाल दिया गया, लेकिन जब सैंपल को बायोप्सी के लिए भेजा तो उसमें कैंसर मिला.
डॉ सचिन कहते हैं कि बीते कुछ सालों में ऐसे मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है जिनको पहले पथरी थी और इसको न निकलवाने के कारण ये कैंसर बन गया. ऐसे मेंअगर आपको पित्त की थैली में पथरी है तो उसका इलाज जरूर करा लें. सर्जरी के माध्यम से आप पथरी को निकलवा सकते हैं. अब इसका ऑपरेशन भी काफी आसान हो गया है. इसमें अब नई तकनीकों की मदद से आधे घंटे से भी कम समय लगता है. कई मरीजों की सर्जरी दूरबीन के माध्यम से 10 मिनट से भी कम समय में हो जाती है.
कैंसर कब है लाइलाज?
मैक्स अस्पताल में ऑन्कोलॉजी विभाग में डॉ. रोहित कपूर बताते हैं कि गॉल ब्लैडर के कैंसर वाले मरीजों की संख्या पहले की तुलना में बढ़ी है. इसमें कई मामले ऐसे आते हैं जहां पथरी की वजह से कैंसर हुआ. ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है जिनकी कैंसर की पहचान आखिरी स्टेज में होती है. इसमें मरीज की जान बचाना काफी मुश्किल हो सकता है.
गॉल ब्लैडर कैंसर के लक्षण क्या होते हैं?
पेट के ऊपरी ओर दाहिने हिस्से में लगातार दर्द
पीलिया होते रहना
भूख का घटना
खुजली की समस्या
गॉल ब्लैडर स्टोन से कैसे बचें
तला-भुना और हाई-फैट भोजन कम करें
पर्याप्त पानी पिएं
अगर पेट में दर्द रहता है तो अल्ट्रासाउंड कराएं
रोज एक्सरसाइज करें.















