उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश की 11 प्रमुख नदियों को जलमार्ग के रूप में विकसित करने की ambitious योजना पर काम कर रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में परिवहन के नए विकल्प तैयार करना, नदी आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना और जलमार्गों के आर्थिक उपयोग को बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि जल परिवहन सस्ता, पर्यावरण–अनुकूल और तेज़ विकल्प बन सकता है, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि सड़क और ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।
राज्य सरकार की योजना के तहत गंगा, यमुना, गोमती, घाघरा, शारदा समेत कुल 11 नदियों को सुव्यवस्थित जलमार्ग के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। इसके लिए विस्तृत अध्ययन, सर्वे व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर कार्य चल रहा है। इस परियोजना में घाटों का कायाकल्प, नदी किनारे सुविधाओं का आधुनिकरण और नेविगेशन सिस्टम मजबूत करना शामिल है, ताकि नौकायन व जल यातायात को सुरक्षित बनाया जा सके।
सबसे आकर्षक योजना लखनऊ की जीवनरेखा कही जाने वाली गोमती नदी से जुड़ी है। राजधानी में जल्द ही गोमती नदी पर वाटर मेट्रो चलाने की तैयारी हो रही है। केरल के कोच्चि मॉडल से प्रेरित इस वाटर मेट्रो के माध्यम से शहर के कई प्रमुख इलाकों को पानी के रास्ते जोड़ा जाएगा। इससे ट्रैफिक जाम के बीच शहरवासियों को तेज़ और सुगम यात्रा का विकल्प मिलेगा। वाटर मेट्रो न सिर्फ परिवहन को आधुनिक बनाएगी बल्कि गोमती नदी के किनारे विकसित हो रहे पर्यटन स्थलों की खूबसूरती को भी नई पहचान देगी।
सरकार का मानना है कि जैसे–जैसे जलमार्गों का विस्तार होगा, प्रदेश में नई नौकरियां बढ़ेंगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यटन का दायरा व्यापक होगा। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो उत्तर प्रदेश देश में जल परिवहन के आधुनिक मॉडल का नया केंद्र बन सकता है।















