मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025: साल का अंतिम और सबसे बड़ा सुपरमून आज रात

आज की रात आसमान में एक दुर्लभ और बेहद आकर्षक खगोलीय दृश्य दिखाई देने वाला है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के अवसर पर पूनम का चांद अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आएगा। इसे साल 2025 का अंतिम सुपरमून माना जा रहा है, जो सामान्य पूर्णिमा के चांद की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत बड़ा और अधिक चमकीला दिखेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सुपरमून को ‘कोल्ड सुपरमून’ का नाम दिया गया है, क्योंकि यह सर्दियों के मौसम में दिखाई देता है और धरती के बेहद करीब होने के कारण और भी ज्यादा भव्य प्रतीत होता है।

आज सूर्यास्त के बाद जब आप आसमान की ओर नजर उठाएंगे तो आपको साल की सबसे शानदार खगोलीय घटना का दर्शन होगा। चांद का आकार सामान्य से बड़ा दिखाई देने का कारण उसका पृथ्वी के सबसे नजदीकी बिंदु पर होना है। ऐसी स्थिति में चांद की चमक भी बढ़ जाती है, जिससे यह पूरी रात आसमान में एक सुनहरी थाली की तरह दमकता नज़र आता है। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह मौका बेहद खास है, क्योंकि इस तरह के सुपरमून वर्ष में कुछ ही बार देखने को मिलते हैं और इस साल यह अंतिम अवसर है।

यह दृश्य नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकता है, किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। ठंडी रात और साफ आसमान इस अनुभव को और भी यादगार बना देंगे। आज की रात का यह भव्य सुपरमून न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि आम लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। इसलिए, यदि आप प्राकृतिक घटनाओं को करीब से महसूस करना पसंद करते हैं, तो आज रात आसमान की ओर जरूर देखें और इस अद्भुत कोल्ड सुपरमून का आनंद लें।

क्या होता है सूपर मून?

सूपरमून तब होता है, जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के बिल्कुल करीब आ जाता है. ऐसा होने पर चंद्रमा का आकार सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा चमकीला नजर आता है. चंद्रमा के पृथ्वी के करीब आने पर ही पूर्णिमा की रात होती है. इस बार चांद धरती से सिर्फ 3,57,000 किमी दूर होगा, इसलिए ये 10 प्रतिशत बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकीला नजर आएगा.

भारत में रात 7 बजे के आसपास दिखेगा

सुपरमून के अलावा आज शीतकालीन तारामंडल भी नजर आने वाला है. आज बृहस्पति ग्रह भी चंद्रमा के पास चमकता हुआ नजर आएगा. आज शाम चंद्र के उदय होने के साथ ही सुपरमून भारत में नजर आने लगेगा. भारत में रात 7 बजे के आसपास बड़ा-बड़ा नारंगी चांद दिखेगा. हर जगह साफ मौसम रहा तो बिना दूरबीन के भी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हर स्थान पर कमाल का चांद नजर आएगा.

साल का सबसे ऊंचा चांद क्यों रहेगा?

सबसे सुंदर नजारा 5 दिसंबर की शाम को होगा, जब सूरज डूबने के 1 घंटे बाद चंद्रोदय होगा. दिसंबर में दिखने वाला पूर्ण चांद रात पूरे साल किसी भी पूर्णिमा से ज्यादा ऊपर चला जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि 21 दिसंबर को सर्दियों की संक्रांति (Winter Solstice) आएगी. उस दिन सूरज पूरे साल में सबसे नीचे रहेगा. चंद्रमा हमेशा सूरज की उल्टी दिशा में होता है इसलिए सूर्य जब सबसे नीचे होता है, तो चंद्रमा सबसे ऊपर चला जाता है.

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