सोलर रेडिएशन से एयरबस विमानों में खतरा बढ़ा: 6000 प्लेनों की जांच शुरू,

हाल ही में सामने आई एक चौंकाने वाली घटना ने वैश्विक एविएशन सेक्टर में चिंता बढ़ा दी है। एयरबस कंपनी ने स्वीकार किया है कि उसके कई विमानों में अचानक ऊंचाई बदलने या सिस्टम गड़बड़ होने का खतरा सोलर रेडिएशन की वजह से बढ़ सकता है। यह खुलासा उस घटना की जांच के दौरान हुआ, जब अक्टूबर में जेटब्लू की एक फ्लाइट, जो अमेरिका और मेक्सिको के बीच उड़ान भर रही थी, अचानक तेज़ी से ऊंचाई खो बैठी। विमान के उड़ान भरते समय उसके ऑनबोर्ड सिस्टम को गलत डेटा मिलता रहा, जिसके चलते विमान नियंत्रण से बाहर हुआ और इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। इस दुर्घटना में कम से कम 15 यात्री घायल हुए, जबकि कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

इस गंभीर घटना के बाद एयरबस ने अपने लगभग 6000 विमानों की जांच और रिकॉल की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने बताया कि समस्या का स्रोत सोलर रेडिएशन है, जो विमान के कुछ सेंसर और एडवांस्ड एवियोनिक्स सिस्टम में असामान्य डेटा भेज सकता है। जब विमान को गलत ऊंचाई या स्पीड की जानकारी मिलती है, तो वह अचानक झटका खा सकता है या नीचे गिरना शुरू कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्य से आने वाली तीव्र रेडिएशन तरंगें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को प्रभावित कर सकती हैं, और यही कारण कुछ एयरबस मॉडलों में देखने को मिला है।

भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय एयरलाइंस—इंडिगो, एयर इंडिया, विस्तारा समेत—अपने फ्लीट में बड़ी संख्या में एयरबस A320, A321 और अन्य मॉडल संचालित करती हैं। हालांकि अभी तक भारत में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन DGCA इस मामले पर बेहद सतर्क हो गया है। अधिकारियों ने कहा है कि एयरबस से तकनीकी रिपोर्ट मांगी गई है और जैसे ही कोई आवश्यक अपडेट या सुरक्षा निर्देश जारी होंगे, भारतीय एयरलाइंस को तुरंत पालन करना होगा। भारत की एयरस्पेस डेंसिटी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह मुद्दा यहां की एविएशन सेफ्टी के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है, इसलिए निगरानी बढ़ा दी गई है।

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी समय में सोलर एक्टिविटी और बढ़ने की आशंका है। सूर्य के चक्र में इस वर्ष तीव्रता बढ़ रही है, जिसके चलते रेडिएशन का प्रभाव उपग्रहों, GPS सिस्टम और विमान के नेविगेशन उपकरणों पर पड़ सकता है। ऐसे में तकनीकी कंपनियों और विमान निर्माताओं को उन्नत सुरक्षा तकनीक विकसित करनी होगी, जो ऐसे असामान्य विकिरण के दौरान भी सिस्टम को सही डेटा प्रदान कर सके। एयरबस ने भी आश्वासन दिया है कि वह सभी प्रभावित विमानों में सॉफ्टवेयर अपडेट और हार्डवेयर चेक जल्द कराएगा।

घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आधुनिक विमान तकनीक कितनी उन्नत होने के बावजूद प्राकृतिक घटनाओं से प्रभावित हो सकती है। यह भी स्पष्ट हो गया है कि दुनियाभर की एयरलाइंस और विमान निर्माता कंपनियों को सोलर रेडिएशन के बढ़ते प्रभावों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। फिलहाल यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और एयरबस तथा वैश्विक एविएशन एजेंसियां इस चुनौती से निपटने के लिए तेजी से कदम उठा रही हैं।

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