सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस वकील के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया, जिसने हाल ही में मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। अदालत ने कहा कि इस तरह की हरकतें न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए होती हैं, लेकिन ऐसे मामलों को तूल देना उचित नहीं। कोर्ट ने माना कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वे इस घटना पर किसी तरह की सजा या कार्रवाई नहीं चाहते। उन्होंने टिप्पणी की कि “इस तरह के लोग खुद अपनी हरकतों से बेनकाब हो जाते हैं, इसलिए उन्हें महत्व देना जरूरी नहीं।”
घटना के दौरान अदालत की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित हुई थी, लेकिन बाद में सुनवाई सामान्य रूप से जारी रही। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल आरोपी वकील को हिरासत में ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस तरह की असंवैधानिक और असम्मानजनक गतिविधियों से न्यायपालिका विचलित नहीं होगी। अदालत ने कहा कि कानून के पेशे में आचार, संयम और सम्मान जरूरी हैं, और ऐसी हरकतें बार और बेंच दोनों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।
सीजेआई गवई के इस फैसले को न्यायिक संयम और परिपक्वता का उदाहरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह रुख दिखाता है कि न्यायपालिका उत्तेजना या प्रतिशोध की बजाय गरिमा और धैर्य से जवाब देना जानती है।















