सतारा जिले में फलटण उपजिला अस्पताल में तैनात महिला डॉक्टर ने बुधवार रात एक होटल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस घटना ने पूरे जिले समेत राज्य के चिकित्सा वर्ग को हिला कर रख दिया.डॉक्टर ने आत्महत्या से पहले अपने हाथ की हथेलियों पर सुसाइड नोट लिखा था. इसमें उन्होंने एक पुलिस उपनिरीक्षक (PSI) गणेश बडने पर चार बार बलात्कार करने और हवालदार प्रशांत बांकर पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है.
मूल रूप से बीड जिले की रहने वाली महिला डॉक्टर फलटण उपजिला अस्पताल में वैद्यकीय अधिकारी के रूप में कार्यरत थीं. वे शहर के विद्यानगर इलाके में एक पेइंग गेस्ट हाउस में रहती थीं. बुधवार रात उन्होंने शहर के एक प्रसिद्ध होटल में कमरा बुक किया और वहीं फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया. डॉक्टर के हाथ पर लिखे संदेश के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है.
सतारा पुलिस अधीक्षक से तत्काल रिपोर्ट तलब
सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी ने पुष्टि की कि आरोपियों में एक PSI और एक नागरिक शामिल है. दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और विशेष टीम उनकी गिरफ्तारी के लिए रवाना की गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सतारा पुलिस अधीक्षक से तत्काल रिपोर्ट तलब की है.
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश
सीएम फडणवीस ने निर्देश दिया कि ‘ऐसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं. दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी. पीड़िता को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है. पुलिस ने PSI गणेश बडने को सस्पेंड कर दिया है, वहीं हवालदार प्रशांत बांकर के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी गई है.
मेडिकल एग्जामिनेशन को लेकर विवाद
जानकारी के अनुसार, महिला डॉक्टर और पुलिस विभाग के बीच पहले से एक मेडिकल एग्ज़ामिनेशन को लेकर विवाद चल रहा था. उन्होंने अपने सीनियर अधिकारियों से कई बार शिकायत की थी कि पुलिस अधिकारी उनका उत्पीड़न कर रहे हैं. उनके रिश्तेदारों का कहना है कि वो लंबे समय से तनाव में थीं, उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था.
महाराष्ट्र की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल
शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक और दर्दनाक घटना है. दोषी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर जेल भेजा जाए. कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा कि ऐसे अधिकारी महाराष्ट्र पुलिस में रहने लायक नहीं हैं. यह घटना महाराष्ट्र की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. सतारा के गार्जियन मंत्री शंभूराज देसाई ने आश्वासन दिया कि जांच निष्पक्ष होगी, किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
महिला आयोग ने भी मामले का लिया संज्ञान
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के लिए अलग टीम गठित कर दी है. आयोग प्रमुख रुपाली चाकनकर ने कहा कि पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाया जाएगा. पीड़िता के रिश्तेदार गोपाल मुंडे ने कहा कि वो बहुत दिनों से परेशान थी. कई बार उसने कहा था कि अगर उसकी शिकायतें नहीं सुनी गईं तो वह कुछ गलत कर बैठेगी. आखिरकार वही हुआ. यह मामला अब राज्य स्तर पर संवेदनशील बन चुका है.
पुलिस की विशेष जांच टीम पीड़िता के लिखित सुसाइड नोट और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है. दोषियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है.















