नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एयरपोर्ट अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी या हिरासत में लेने की कार्रवाई जल्दबाजी या बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी हाल ही में दर्ज की गई उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की, जिनमें यात्रियों को एयरपोर्ट पर बिना वारंट या उचित कारण के रोकने और हिरासत में लेने की शिकायतें की गई थीं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी जांच एजेंसी को कानून के तहत दी गई शक्तियों का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं है। अगर कोई व्यक्ति विदेश यात्रा पर जा रहा है, तो केवल संदिग्ध होने के आधार पर उसे रोकना या हिरासत में लेना नागरिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी या अन्य एजेंसियों को गिरफ्तारी से पहले पर्याप्त साक्ष्य और उचित कारण होना चाहिए, अन्यथा यह कार्रवाई मनमानी मानी जाएगी।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों को अपने अधिकारों का प्रयोग ‘संविधान की भावना और प्रक्रिया’ के अनुरूप करना चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि ईडी और एयरपोर्ट इंटेलिजेंस यूनिट्स को इस संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं ताकि यात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर भविष्य में बिना कानूनी आधार के किसी को रोका या गिरफ्तार किया गया, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश को नागरिक अधिकारों और कानून व्यवस्था के संतुलन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।















