अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि वे “चुटकी में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष को रोक सकते हैं।” उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आठ बड़े युद्धों को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी और लाखों लोगों की जान बचाई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर वे चाहते, तो कुछ ही दिनों में कई देशों के बीच जारी हिंसक संघर्ष समाप्त कर सकते थे, लेकिन उनके प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मान्यता नहीं दी।
ट्रंप ने नोबेल कमेटी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि “दुनिया में जिन लोगों ने सबसे ज्यादा जानें बचाईं, उन्हें नजरअंदाज किया गया, जबकि कई ऐसे नेताओं को सम्मान मिला जिन्होंने सिर्फ बयान दिए।” उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को “कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया विवाद” बताया और कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता से इसे तुरंत सुलझाया जा सकता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सीमा पार आतंकवाद, शरणार्थी संकट और सुरक्षा मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दावा उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, क्योंकि वे 2026 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में फिर से अपनी राजनीतिक साख मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उनके इन बयानों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।















