मुजफ्फरनगर में बासमती धान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन राम कॉलेज में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। उपकृषि निदेशक द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया, जबकि एपीडा मेरठ से आए वैज्ञानिक ने किसानों को संबोधित करते हुए बासमती धान में कीटनाशक का उपयोग कम करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को पौध सुरक्षा, मिट्टी की उर्वरकता और सतत कृषि तकनीकों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम में उपस्थित कृषि विशेषज्ञों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, पानी की बचत और फसल उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर किसानों को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने किसानों को यह समझाया कि कम रासायनिक उपयोग न केवल फसल की गुणवत्ता बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है। कार्यशाला में लगभग 200 किसानों ने भाग लिया, जिसमें प्रगतिशील किसानों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही छात्र प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और ट्रॉफी देकर उनकी भागीदारी को भी सराहा गया।
कार्यक्रम में कृषि शिक्षा और अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया गया और किसानों को आधुनिक कृषि विज्ञान के प्रयोग अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने बताया कि जैविक खेती अपनाने से उत्पादकता में सुधार के साथ-साथ बाजार में मांग भी बढ़ती है। इसके अलावा किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नई योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की गई।
जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों ने भी कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों की स्थिति मजबूत बनाने पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब कृषि क्षेत्र और किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। कार्यशाला में कृषि विभाग के कई विशेषज्ञ, शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिन्होंने तकनीकी सवालों का समाधान करते हुए किसानों के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए।
इस अवसर पर कृषि छात्रों को भी प्रशिक्षण दिया गया, जिससे उन्हें फील्ड स्तर पर जैविक खेती और टिकाऊ कृषि तकनीकों को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और छात्रों दोनों को जागरूक करना और कृषि के आधुनिक तरीकों को प्रोत्साहित करना था। कार्यशाला के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली बासमती धान उत्पादन, फसल संरक्षण और पर्यावरण के अनुकूल खेती के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।
कुल मिलाकर यह कार्यशाला किसानों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरक साबित हुई, जिसने उन्हें जैविक और कम रासायनिक खेती की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। किसानों ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस तरह की जागरूकता कार्यशालाओं से उनकी फसल की पैदावार और आय दोनों में सुधार होगा।















