आयुर्वेदिक दवाओं में स्टेरॉयड की मिलावट से सतर्क रहने की अपील, मुजफ्फरनगर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का बड़ा बयान

मुजफ्फरनगर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सुभाष चौहान ने एक गंभीर मुद्दे को उजागर करते हुए उत्तर प्रदेश के सभी आमजन को सतर्क रहने की अपील की है उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कुछ आयुर्वेदिक दवाओं की कंपनियां ऐसी हैं जो सेहत बनाने के नाम पर भोले-भाले लोगों को भ्रमित कर रही हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे आयुर्वेदिक दवाओं में स्टेरॉयड मिलाकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं, जो बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।सुभाष चौहान ने कहा कि स्टेरॉयड का सेवन करने से शरीर में कई गंभीर दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। यह एक चिंताजनक स्थिति है क्योंकि लोग आयुर्वेदिक औषधि को सुरक्षित और प्राकृतिक मानकर उपयोग करते हैं, लेकिन इसमें स्टेरॉयड की मिलावट से स्वास्थ्य को भारी खतरा उत्पन्न हो रहा है।इसी संदर्भ में हाल ही में एक मामला उत्तर प्रदेश में सामने आया। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉक्टर ईशम सिंह ने एक पत्र के माध्यम से एसोसिएशन को जानकारी दी। इस पत्र में बताया गया कि हरियाणा के अंबाला स्थित डॉक्टर विश्वास आयुर्वेद इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा बनाई गई विश्वास गुड हेल्थ कैप्सूल (बैच नंबर डीबी 10003) का सैंपल परीक्षण के लिए राजकीय जन विश्लेषक, लखनऊ भेजा गया था। परीक्षण के दौरान इस दवाई में एलोपैथिक स्टेरॉयड बेटामेथासोन की मिलावट पाई गई। यह तथ्य सामने आने के बाद एसोसिएशन ने इसे आमजन और आयुर्वेद दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है।सुभाष चौहान ने कहा कि आम जनता को ऐसी दवाओं से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि स्टेरॉयड युक्त दवाइयों के दुष्परिणाम लंबे समय तक शरीर पर बुरा असर डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की दवाओं से अस्थायी रूप से तो लाभ महसूस होता है, लेकिन भविष्य में यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।उन्होंने आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं से भी आग्रह किया कि वे सेहत बनाने के नाम पर लोगों के साथ धोखा न करें और आयुर्वेद की विश्वसनीयता को बनाए रखें। चौहान ने कहा कि आयुर्वेद की पहचान प्राकृतिक और सुरक्षित उपचार पद्धति के रूप में है, इसलिए इसमें स्टेरॉयड मिलाना न केवल लोगों की सेहत के लिए घातक है बल्कि आयुर्वेद की गरिमा को भी नुकसान पहुंचाने वाला है।इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के सभी दवा विक्रेताओं से भी अपील की कि वे ऐसी दवाओं की बिक्री से बचें। साथ ही दवा विक्रेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे दवाइयां हमेशा बिल से खरीदें और बिल से ही बेचें। ऐसा करने से नकली या मिलावटी दवाओं की सप्लाई चेन को रोका जा सकेगा।सुभाष चौहान ने कहा कि यह समय लोगों को जागरूक करने का है। यदि हर व्यक्ति और दवा विक्रेता जिम्मेदारी से कार्य करेगा, तो इस तरह की धोखाधड़ी और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों पर लगाम लगाई जा सकेगी। उन्होंने दोहराया कि स्टेरॉयड युक्त दवाओं से दूरी बनाकर ही हम अपने और समाज के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।

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