पठानकोट में रावी नदी पर हड़कंप: माधोपुर हेडवर्क्स के चार फ्लड गेट टूटे, 65 कर्मचारी पानी में फंसे

पठानकोट जिले के माधोपुर हेडवर्क्स पर रविवार को बड़ा हादसा हो गया, जब रावी नदी पर बने रणजीत सागर डैम से अचानक पानी छोड़े जाने के बाद स्थिति बेकाबू हो गई। पानी का दबाव इतना ज्यादा था कि हेडवर्क्स के चार फ्लड गेट टूट गए। इस दौरान वहां काम कर रहे करीब 65 कर्मचारी और अधिकारी तेज बहाव में घिर गए और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। सेना और आपदा प्रबंधन बल की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और हेलीकॉप्टर की मदद से कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास जारी है।

जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह रणजीत सागर डैम से अधिक मात्रा में पानी छोड़ा गया। पानी के तेज बहाव ने हेडवर्क्स पर दबाव बढ़ा दिया, जिससे चार फ्लड गेट टूट गए। अचानक गेट टूटने से पानी और तेजी से बहने लगा और हेडवर्क्स पर मौजूद कर्मचारी वहीं फंस गए। उनमें से कुछ सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि वे बीच में ही रुक गए। प्रशासन के मुताबिक, अब तक 65 कर्मचारियों और अधिकारियों के फंसे होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक कर्मचारी लापता है जिसकी तलाश की जा रही है।

हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत अभियान शुरू किया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने सेना को बुलाया और हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू अभियान छेड़ा गया। बचाव दल ने फंसे हुए कर्मचारियों तक पहुंचने के लिए नाव और रस्सियों का भी इस्तेमाल शुरू किया है। वहीं, आसपास के गांवों को भी सतर्क कर दिया गया है, ताकि पानी के बढ़ते स्तर से लोग प्रभावित न हों।

स्थानीय लोगों ने बताया कि अचानक डैम से पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। देखते ही देखते हालात इतने बिगड़ गए कि मजदूर और अधिकारी सुरक्षित बाहर नहीं निकल पाए। चश्मदीदों का कहना है कि घटना के समय लोग गेट की मरम्मत और देखरेख का काम कर रहे थे। तभी पानी का बहाव इतना तेज हुआ कि गेट टूट गए और सभी लोग बीच में ही फंस गए।

प्रशासन ने घटनास्थल पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात कर दी हैं। डैम और हेडवर्क्स की सुरक्षा को लेकर इंजीनियर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं। हालांकि, पानी का दबाव अभी भी अधिक है और रेस्क्यू अभियान में दिक्कतें आ रही हैं।

वहीं, इलाके के लोगों में भी डर का माहौल है। लोगों को आशंका है कि अगर पानी का स्तर और बढ़ा तो निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। प्रशासन ने फिलहाल निचले क्षेत्रों में रहने वालों को अलर्ट जारी कर दिया है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की तैयारी भी की जा रही है।

यह हादसा एक बार फिर बड़े बांधों और हेडवर्क्स की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर इन संरचनाओं की तकनीकी जांच और मजबूत रखरखाव बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल सभी की नजरें राहत और बचाव अभियान पर टिकी हुई हैं। प्रशासन उम्मीद जता रहा है कि जल्द ही सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा।

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