मुजफ्फरनगर। गांधी कॉलोनी स्थित लाल द्वारा मंदिर में चल रहे भागवत कथा सप्ताह के अंतर्गत विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सभासद अमित पटपटिया ने उपस्थित जनमानस को संबोधित करते हुए कहा कि जीव सेवा से बढ़कर कोई साधना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग जीव मात्र की सेवा करना है। यदि हम परमात्मा की संतान के दुख-दर्द दूर करने में सहायक बनेंगे तो ईश्वर सहज ही प्रसन्न हो जाएंगे। यही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।अपने उद्बोधन में अमित पटपटिया ने सनातन धर्म की महानता और सुंदरता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे धर्म की विशेषता यह है कि यहां ईश्वर को विभिन्न रूपों में प्रेम करने की परंपरा रही है। कोई उन्हें माता-पिता मानकर पूजा करता है, कोई सखा, मार्गदर्शक या प्रियतम रूप में उन्हें स्वीकार करता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि मीराबाई ने श्रीकृष्ण को प्रियतम मानकर प्रेम किया, सुदामा ने उन्हें मित्र के रूप में अपनाया, अर्जुन ने उन्हें मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार किया और गोकुलवासियों ने उन्हें कन्हैया के रूप में प्यार दिया। यही लचीलापन और भावनात्मक जुड़ाव सनातन संस्कृति की आत्मा है।कथा व्यास गंगोत्री तिवारी मृदुल ने इस अवसर पर श्रीकृष्ण जन्म का अद्भुत और भावनात्मक वर्णन किया। उनके मुखारविंद से कृष्ण जन्म की लीलाओं का वृत्तांत सुनते ही पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में झूमते हुए हरि नाम संकीर्तन में लीन हो गए। कथा के दौरान भक्तों ने जयकारों के साथ आनंद की अनुभूति की और वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक रंग में रंग गया।इस आयोजन में समर्पित युवा समिति के कार्यों की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की गई। समिति द्वारा समाजहित में चलाए जा रहे रक्तदान, प्लेटलेट डोनेशन और नेत्रदान जैसे कार्यों को अनुकरणीय बताते हुए अमित पटपटिया ने कहा कि ऐसे सेवाभावी प्रयास न केवल समाज को नई दिशा देते हैं बल्कि मानवता की असली पहचान भी कराते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आगे आकर ऐसे कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपनी ऊर्जा समाज की भलाई में लगाएं।कथा और प्रवचन के साथ-साथ कार्यक्रम की व्यवस्थाएं भी अनुकरणीय रहीं। श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा गया। व्यवस्थाओं में हरिमोहन गर्ग, महेंद्रू सैनी और अन्य कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा, जिनकी मेहनत से कार्यक्रम सुचारू रूप से सम्पन्न हुआ।पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि केवल पूजा-पाठ से ही नहीं बल्कि समाज सेवा और जीव मात्र की सहायता से ही ईश्वर की सच्ची कृपा प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार भागवत कथा सप्ताह के अंतर्गत हुए इस आयोजन ने लोगों को न सिर्फ आध्यात्मिक आनंद प्रदान किया बल्कि उन्हें यह भी प्रेरित किया कि मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।















