बंगाल में गठबंधन के लिए तैयार, कांग्रेस करे पहलः 2026 में ममता को चुनौती?

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधान सभा चुनाव होने वाले हैं. इसको लेकर अभी से ही हर पार्टी ने अपनी कमर कस ली है. इसी बीच विधानसभा चुनाव को लेकर CPI(M) और लेफ्ट फ्रंट ने अपनी रणनीति साफ कर दी है.न्यूज एजेंसी आईएएनएस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, CPI(M) चाहती है कि कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे का गठबंधन हो, लेकिन इसके लिए पहल कांग्रेस को करनी होगी. CPI(M) के पश्चिम बंगाल सचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य मोहम्मद सलीम ने खुलकर कहा है कि गठबंधन का फैसला अब कांग्रेस के पाले में है.

कांग्रेस करे पहल, हम गठबंधन को तैयार
सलीम ने कहा, “अगर कांग्रेस चाहती है कि 2021 के विधानसभा, 2024 के लोकसभा और 2025 के कालीगंज उपचुनाव की तरह इस बार भी लेफ्ट फ्रंट के साथ गठबंधन हो तो उन्हें बातचीत शुरू करनी होगी.” CPI(M) के एक केंद्रीय समिति सदस्य ने बताया कि इस साल जून में नदिया के कालीगंज उपचुनाव में कांग्रेस ने लेफ्ट फ्रंट से समर्थन मांगा था. तब लेफ्ट फ्रंट ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा और कांग्रेस की मदद की. सदस्य ने कहा, “कांग्रेस का एक धड़ा बार-बार संकेत दे रहा है कि वे 2026 में भी गठबंधन चाहते हैं. लेकिन अब गेंद उनके पाले में है. हम उनके लिए फैसला नहीं ले सकते.”

कांग्रेस का रुख अभी साफ नहीं
पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार ने कहा, “गठबंधन या सीट बंटवारे का फैसला ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) लेगी. अभी AICC से कोई निर्देश नहीं मिला है. जो भी फैसला होगा, वही लागू होगा.”

CPI(M) की रणनीति के पीछे का खेल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि CPI(M) की यह रणनीति सोची-समझी है. इस साल अप्रैल में मदुरै में हुई CPI(M) की 24वीं पार्टी कांग्रेस में एक प्रस्ताव पास हुआ था, जिसमें स्वतंत्र राजनीतिक रुख पर जोर दिया गया. एक स्थानीय विश्लेषक ने कहा, “इस प्रस्ताव के चलते CPI(M) की बंगाल इकाई गठबंधन के लिए पहल नहीं कर सकती. इसलिए वे चाहते हैं कि कांग्रेस पहले कदम बढ़ाए.”

ममता की राह होगी मुश्किल?
कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट का गठबंधन 2016 के विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ था. हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ. लेकिन 2021 और 2024 में दोनों फिर साथ आए. अगर 2026 में भी यह गठबंधन मजबूत होता है तो ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनौती बढ़ सकती है. लेफ्ट और कांग्रेस का एकजुट होना TMC के वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां दोनों की अच्छी पकड़ है.अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस मौके को भुनाएगी? या फिर ममता की TMC एक बार फिर बाजी मारेगी? 2026 का रण दिलचस्प होने वाला है.

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