मुज़फ्फरनगर के जिला विद्यालय प्रशिक्षण केंद्र में साइबर अपराध थाना द्वारा एक विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के शिक्षकों और विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित बनाना और साइबर अपराधों की रोकथाम को सशक्त बनाना रहा।कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ के निर्देशन में साइबर क्राइम टीम ने प्रतिभागियों को बताया कि कैसे वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सतर्क रहकर खुद को और दूसरों को साइबर धोखाधड़ी, शोषण और तकनीकी अपराधों से बचा सकते हैं। प्रशिक्षण सत्र में विशेष रूप से Cyber Volunteer योजना की चर्चा की गई, जिसके अंतर्गत आम नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करके उन्हें सुरक्षा व्यवस्था में भागीदार बनाया जाएगा। इसके साथ ही CyberClub की अवधारणा पर भी विस्तार से जानकारी दी गई, जिसमें विद्यालयों व शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए क्लबों की स्थापना की जाएगी।एक अन्य महत्वपूर्ण विषय Cyber Slavery रहा, जिसमें बताया गया कि किस प्रकार लोग डिजिटल माध्यमों से शोषण या नियंत्रण के शिकार हो सकते हैं, और इन अपराधों की पहचान व रिपोर्टिंग कैसे की जा सकती है। NECMEC (National Center for Missing & Exploited Children) के कार्यों पर भी प्रकाश डाला गया, ताकि गुमशुदा और शोषित बच्चों की ऑनलाइन पहचान व सुरक्षा को लेकर सजगता बढ़ाई जा सके।अंत में Cyber Awareness विषय पर इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को डिजिटल हैकिंग, सोशल मीडिया धोखाधड़ी, पासवर्ड सुरक्षा और फिशिंग जैसे साइबर खतरों से सतर्क रहने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य आम नागरिकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना रहा। इस तरह के कार्यक्रमों से न केवल साइबर जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपनों को भी सुरक्षित आधार मिलेगा।















