कांधला रोड पर मेला आयोजन बना विवादों का केंद्र, दोहरे रवैये पर उठे सवाल

बुढ़ाना के कांधला रोड पर प्रस्तावित मेला आयोजन से पहले ही विवादों में घिर गया है। नए स्थान पर आयोजित होने जा रहे इस मेले को लेकर कस्बे के जागरूक नागरिकों ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। खास बात यह है कि पूर्व में बुढ़ाना फल मंडी के पास मेला आयोजित करने की अनुमति मांगी गई थी, जिसे पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर अस्वीकृत कर दिया गया था। उस समय पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि यह स्थान मेला आयोजन के लिए नया है और वहां कभी पूर्व में ऐसा आयोजन नहीं हुआ है। साथ ही, झूलों, कार सर्कस आदि के कारण जनहानि की आशंका जताई गई थी।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब फल मंडी के पास मेले को केवल “नया स्थान” बताकर और सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं दी गई थी, तो कांधला रोड पर हो रहे मेले को कैसे हरी झंडी मिल गई? क्योंकि यह भी एक नया स्थान है, जहां पहले कभी मेला आयोजित नहीं हुआ। साथ ही, यह भूमि खेती की श्रेणी में आती है और वहीं एक मजार भी स्थित है, जिसे लेकर पहले ही कस्बे में विवाद उत्पन्न हो चुका है। इससे जुड़े धार्मिक और सामाजिक पहलू को नज़रअंदाज़ कर, मेले की अनुमति देना कई लोगों को हैरान कर रहा है।

इस मेले में भी छोटे-बड़े झूले, मारूति कार सर्कस, खाने-पीने के स्टॉल, काला जादू और भूत बंगला जैसे आयोजन शामिल होंगे। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि जिस कारण पहले मेले को खारिज किया गया, वही चीजें इस मेले में भी मौजूद हैं, फिर भी अनुमति कैसे मिल गई? क्या यह प्रशासन की दोहरी नीति का उदाहरण है या किसी राजनीतिक/प्रशासनिक दबाव का नतीजा?

स्थानीय नागरिकों ने जनहित में इस मेले की अनुमति को निरस्त करने की मांग की है और उच्चाधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने की तैयारी भी कर ली है। कई संगठनों और नागरिक समूहों ने चेताया है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो वे न्यायिक व प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाएंगे। बुढ़ाना जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रशासन की लापरवाही कहीं भारी न पड़ जाए, यह सोचने का विषय है।

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