राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अन्ता से विधायक कंवरलाल मीणा की सदस्यता समाप्त किए जाने को सत्य और न्याय की जीत करार दिया है। उन्होंने इसे कांग्रेस के “संविधान बचाओ संघर्ष” का परिणाम बताया और कहा कि यह पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता की विजय है। जूली ने कहा कि राष्ट्रीय नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने संविधान को बचाने का जो संकल्प लिया था, उसी मार्ग पर चलते हुए यह लड़ाई लड़ी गई और अंततः संविधान की गरिमा कायम रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष ने निर्णय लेने में अनावश्यक विलंब किया, जिससे विधायक पद पर रहते हुए मीणा जेल गए और इससे विधानसभा की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। जूली ने बताया कि इस मामले को लेकर कांग्रेस विधायक दल ने तीन बार विधानसभा अध्यक्ष और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। बाद में निर्वाचन आयोग से भी शिकायत की गई, परंतु सजायाफ्ता विधायक की सदस्यता बचाने के प्रयास होते रहे।
आखिरकार न्यायालय की शरण लेनी पड़ी और राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका संख्या 27321/2025 दायर की गई। बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन आगे की संभावित किरकिरी को भांपते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने मीणा की सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया। जूली ने इस निर्णय को संविधान की जीत और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा की पुनर्स्थापना बताया।















