उपराष्ट्रपति ने हाल ही में न्यायपालिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी जज के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होती है और उसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होती, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में चुप्पी साध लेना न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जब न्यायपालिका खुद इस तरह के मामलों में कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाती, तो फिर उसे देश के राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। उनका यह बयान न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन और जवाबदेही की बहस को एक बार फिर तेज कर गया है।















