ढाका की सड़कों पर इन दिनों अजीब सा सन्नाटा पसरा है। जो गलियां कभी भीड़ और चहल-पहल से भरी रहती थीं, वहां अब सन्नाटा छाया हुआ है। बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़कर जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पलायन के पीछे महंगाई, बेरोजगारी, जलवायु परिवर्तन और बेहतर जीवन की तलाश जैसे कई कारण हैं। बढ़ती आर्थिक समस्याओं और रोजगार के अभाव में लोग दूसरे शहरों और देशों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
सड़कों पर सन्नाटा, रेल-सड़क मार्ग ठप्प
बांग्लादेश में ईद को लेकर 6 अप्रैल तक की छुट्टी है. पहली बार बांग्लादेश में ईद के मौके पर इतने दिनों की छुट्टी कर्मचारियों को दी गई है. छुट्टी की वजह से लोग ढाका छोड़कर अपने घर की तरफ निकल गए हैं.
कहा जा रहा है कि प्रशासन को ढाका छोड़कर लोगों के घर जाने की उम्मीद तो थी, लेकिन एक साथ इतने लोग निकल जाएंगे, यह सरकार के आला अधिकारियों ने सोचा नहीं था.
बांग्लादेश सरकार के मुताबिक ढाका में करीब 4 करोड़ लोग रहते हैं. इनमें रोहिंग्या शरणार्थियों का आंकड़ा भी शामिल हैं. बांग्लादेश में करीब 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं.
लोगों के पलायन से डेंगू का खतरा बढ़ा
डेली स्टार के मुताबिक ढाका से लाखों लोगों के पलायन ने बांग्लादेश की राजधानी पर डेंगू का संकट बढ़ा दिया है. लोगों के घर चले जाने से पानी जमा होगा और गंदगी की वजह से यहां डेंगू के मच्छर फैल सकते हैं.
रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से कहा गया है कि अगर सरकार तुरंत सतर्कता नहीं बरतती है तो आने वाले दिन ढाका के लिए आसान नहीं रहने वाला है. 2024 में ढाका में 575 लोगों की मौत डेंगू की वजह से हो गई थी.















