मुजफ्फरनगर: शाहपुर के गांव पालड़ी में अमरूद तोड़ने से मना करने को लेकर हुई मारपीट के मामले में पुलिस की एकतरफा कार्रवाई को लेकर पीड़ित परिवार ने राष्ट्रीय सामाजिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष चौधरी से मुलाकात की। परिवार ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
शाहपुर क्षेत्र की समाजसेवी पहलवान जीनत चौधरी सोमवार को पीड़ित हनीफ पक्ष के लोगों के साथ मनीष चौधरी के कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने बताया कि पेट्रोल पंप के पास स्थित बाग में अमरूद तोड़ने को लेकर वसीम और वकील के साथ गांव के कुछ युवकों ने मारपीट की थी। इस झगड़े में दोनों पक्ष घायल हुए थे, लेकिन किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बनाई गई वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने केवल एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की।
जब वकील और वसीम पक्ष के लोग रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर धारा 151 में चालान काटकर हवालात में डाल दिया। कुछ समय बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके बाद मामला शांत था, लेकिन 19 मार्च को राजनीतिक दबाव के चलते इस परिवार के 12 लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज कर दिए गए, जिससे पीड़ित परिवार को परेशान किया जा रहा है।
मनीष चौधरी ने पुलिस की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि यह एक आपसी झगड़ा था, जिसमें पहले ही शांति भंग की कार्रवाई हो चुकी थी। इसके बावजूद एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया जाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि राजनीतिक दबाव में इस परिवार के खिलाफ कोई अन्याय न हो।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने इस परिवार के खिलाफ और उत्पीड़न भरी कार्रवाई की, तो उनका संगठन सड़क पर उतरकर विरोध करेगा। इस मौके पर भारत लोक सेवा पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष केपी चौधरी, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मेरठ प्रांत संयोजक फैजुर रहमान, जीनत चौधरी सहित अनेक महिलाएं और पीड़ित परिवार के सदस्य मौजूद रहे।















