वक्फ बोर्ड पर बड़ा आरोप: पसमांदा मुस्लिम मंच ने बताया ‘सफेद हाथी’, संपत्तियों की लूट का लगाया आरोप

मुजफ्फरनगर में राष्ट्रवादी पसमांदा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने वक्फ बोर्ड पर गरीब मुस्लिम समाज की उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाया। मंच के अध्यक्ष शमशाद मीर ने कहा कि वक्फ बोर्ड के पास देश की तीसरी सबसे बड़ी संपत्ति होने के बावजूद यह गरीबों, यतीम बच्चों और शिक्षा के लिए कुछ नहीं कर रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि वक्फ की अरबों की संपत्ति का लाभ समाज को क्यों नहीं मिल रहा?

मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजवान अंसारी ने वक्फ माफियाओं और मुतवल्लियों की मिलीभगत पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों पर कब्जा और लूट जारी है, जबकि मुस्लिम समाज शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौ. इदरीश ने सांसद असदुद्दीन ओवैसी, इमरान मसूद और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना मदनी को चुनौती देते हुए कहा कि वे कैमरे के सामने आकर बताएं कि वक्फ बोर्ड ने पसमांदा समाज के लिए क्या किया है। उन्होंने पूछा कि कितने अस्पताल और कॉलेज बने? कितने गरीबों को घर मिले? लेकिन इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिला।

मंच ने खुलासा किया कि उत्तर प्रदेश में सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास 1,06,932 और शिया वक्फ बोर्ड के पास 15,386 संपत्तियां हैं। इसके बावजूद मुस्लिम समाज की स्थिति दयनीय बनी हुई है। मंच ने मांग की कि वक्फ बोर्ड अपनी संपत्तियों और कमाई का पूरा हिसाब दे और गरीबों व यतीमों के लिए योजनाओं को लागू करे।

हालांकि, मंच ने वक्फ बोर्ड के हालिया फैसले का स्वागत किया और इसे शिक्षा और गरीबी उन्मूलन के लिए ‘गेम-चेंजर’ बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में शमशाद मीर, मौ. इदरीश, रिजवान अंसारी, सदरे आलम और कारी आस मोहम्मद जैसे दिग्गजों ने वक्फ बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की।

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