कैंसर से पीड़ित बुजुर्गों के इलाज में कुपोषण बड़ी बाधा बन रहा है। एम्स के एक शोध में इसका खुलासा हुआ है। कुपोषण के चलते इलाज के दौरान उनके शरीर पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं।एम्स के चिकित्सकों ने डेढ़ वर्ष तक यहां भर्ती 142 बुजुर्ग (60 साल से अधिक उम्र के) कैंसर रोगियों पर शोध किया। ऑन्कोलॉजी विभाग के डाॅ. दीपक सुंद्रियाल ने बताया कि शोध में स्पष्ट हुआ है कि 91.6 फीसदी बुजुर्ग कैंसर मरीजों में कुपोषण पाया गया। कुपोषण के कारण इन मरीजों में अन्य समस्याएं भी हो गई हैं। डाॅ. सुंद्रियाल ने बताया कि शोध में स्पष्ट हुआ कि कुपोषण के कारण 35 फीसदी बुजुर्ग कैंसर मरीजों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम पाया गया। 30 फीसदी मरीजों में शारीरिक शिथिलता पाई गई।40 फीसदी मरीज अपने दैनिक कार्यों (भोजन करना, नहाना, कपड़े पहनना, बिस्तर से उठना आदि) को करने में असमर्थ पाए गए। 20 फीसदी मरीज घर के बाहर के कार्यों में असमर्थ पाए गए। 57 फीसदी मरीज मानसिक अवसाद और 35 फीसदी मरीज भूलने की समस्या से ग्रसित पाए गए। डाॅ. दीपक सुंद्रियाल ने बताया कि कुपोषण के चलते अधिकतर मरीज में इस तरह के एक बीमारी से अधिक लक्षण मिले हैं। शोध टीम में जेरिएट्रिक विभागाध्यक्ष प्रो. मीनाक्षी धर, डाॅ. उज्जवल श्रीवास्तव, डाॅ. मृदृल खन्ना, डाॅ. अमित सहरावत और डाॅ. दीपक सुंद्रियाल शामिल रहे।शोध से यह निष्कर्ष निकला है कि बुजुर्ग कैंसर के मरीजों के इलाज से पहले उनके पोषण का आंकलन आवश्यक है। जिससे उनका पोषण पूर्ण किया जा सके। पोषण पूर्ण होने के बाद किया गया उपचार से रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है। – डाॅ. सुंद्रियाल, ऑन्कोलॉजी विभाग विभाग एम्स
कीमोथेरेपी का पड़ता है नकारात्मक प्रभाव
एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि बुजुर्ग कैंसर रोगियों के पोषण को पूरा कर ही कैंसर का इलाज शुरू किया जाना चाहिए। अक्सर किसी बुजुर्ग व्यक्ति को कैंसर बीमारी होने पर चिकित्सा संस्थान तुरंत कैंसर का उपचार शुरू कर देते हैं। उपचार के दौरान कई बुजुर्ग कैंसर रोगियों में कीमोथेरेपी आदि के नकारात्मक प्रभाव दिखते हैं। जिस कारण मरीज उपचार बीच में ही छोड़ देते हैं। वहीं कुछ बुजुर्ग कैंसर रोगियों में उपचार असफल हो जाता है। चिकित्सकों ने बताया कि इसका कारण बुजुर्गों में कुपोषण है।















